आयुष्मान कार्ड की लिमिट 5 से 10 लाख — क्या यह वादा है या बस एक 'विचाराधीन' फ़ाइल?
आयुष्मान भारत कार्ड की लिमिट अभी 5 लाख रुपये प्रति परिवार प्रति वर्ष है। 10 लाख करने का कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है। सरकार के स्तर पर प्रस्ताव विचाराधीन बताया जा रहा है, लेकिन स्वास्थ्य मंत्रालय या NHA की ओर से कोई अधिसूचना या पुष्टि नहीं आई है।
पाँच लाख रुपये। यही वह रकम है जो आयुष्मान भारत कार्ड आपके परिवार को एक साल में देता है — और यही वह रकम है जो किसी सरकारी अस्पताल में ओपन-हार्ट सर्जरी या कैंसर की कीमोथेरेपी के पहले दो-तीन महीनों में ख़त्म हो जाती है। अब सोशल मीडिया पर एक दावा तूफ़ान की तरह फैल रहा है — कि मोदी सरकार ने यह लिमिट बढ़ाकर 10 लाख कर दी है। सच क्या है? फ़ाइलें क्या कहती हैं? और अगर यह सच भी हो जाए, तो क्या आपके इलाज का संकट सचमुच ख़त्म होगा?
News18 हिंदी की रिपोर्ट के अनुसार, आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) की कवरेज लिमिट को 5 लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपये प्रति परिवार प्रति वर्ष करने का प्रस्ताव विचाराधीन है। लेकिन — और यह 'लेकिन' बहुत बड़ा है — इस पर न कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी हुई है, न राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) ने कोई प्रेस विज्ञप्ति दी है, और न ही स्वास्थ्य मंत्रालय की वेबसाइट पर कोई संशोधन दिखता है।
इसका सीधा मतलब: अभी यह एक प्रस्ताव है, लागू नियम नहीं।
70 साल से ऊपर वालों के लिए क्या बदला — और क्या नहीं
सितंबर 2024 में केंद्रीय कैबिनेट ने एक अहम फ़ैसला ज़रूर लिया था — 70 वर्ष और उससे अधिक उम्र के सभी बुज़ुर्गों को आयुष्मान भारत का कवर दिया जाएगा, चाहे उनकी आर्थिक स्थिति कैसी भी हो। सरकारी प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के अनुसार, इस विस्तार से लगभग 6 करोड़ अतिरिक्त बुज़ुर्गों को फ़ायदा पहुँचने का अनुमान था। यह बदलाव वास्तविक है और लागू हो चुका है। लेकिन ध्यान दीजिए — इसमें भी कवरेज की रकम 5 लाख रुपये प्रति वर्ष ही रखी गई, 10 लाख नहीं।
यानी बुज़ुर्गों के लिए पात्रता का दायरा बढ़ा, कवरेज की रकम नहीं।
5 लाख की सीमा कहाँ छोटी पड़ रही है — असली आँकड़े
आयुष्मान भारत के आधिकारिक पोर्टल (pmjay.gov.in) के अनुसार, इस योजना के तहत अब तक लगभग 34 करोड़ आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं और 7 करोड़ से ज़्यादा अस्पताल में भर्ती होने के दावे (hospitalisation claims) स्वीकृत हो चुके हैं। ये आँकड़े विशाल हैं। लेकिन सिक्के का दूसरा पहलू देखिए।
लैंसेट ग्लोबल हेल्थ में 2023 में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, भारत में कैंसर के इलाज का औसत out-of-pocket ख़र्च प्रति मरीज़ लगभग ₹1.5 लाख से ₹5.7 लाख तक होता है — और यह सिर्फ़ एक साल का आँकड़ा है। गंभीर कैंसर में इलाज दो-तीन साल चलता है। कार्डियक बाइपास सर्जरी प्राइवेट अस्पतालों में ₹3-6 लाख, और किडनी ट्रांसप्लांट ₹5-15 लाख तक जा सकता है। WHO की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर साल लगभग 5.5 करोड़ लोग स्वास्थ्य ख़र्चों के कारण ग़रीबी में धकेले जाते हैं — यानी अस्पताल का बिल एक मध्यवर्गीय परिवार को रातोरात ग़रीबी रेखा के नीचे पहुँचा सकता है।
अब ज़रा सोचिए — अगर 5 लाख की लिमिट वाला आयुष्मान कार्ड किसी कैंसर मरीज़ के पहले साल में ही ख़त्म हो जाता है, तो दूसरे साल वह कहाँ जाएगा?
10 लाख हो भी जाए — तो असली चुनौती क्या है?
इंडिया हेराल्ड का विश्लेषण कहता है कि भले ही सरकार कल लिमिट दोगुनी कर दे, तीन बुनियादी समस्याएँ जस की तस रहेंगी।
पहली — अस्पतालों की कमी और पैकेज रेट का जाल। आयुष्मान भारत में इलाज तय पैकेज रेट पर होता है जो बाज़ार दर से अक्सर 30-50% कम होते हैं। नतीजा? कई प्राइवेट अस्पताल या तो योजना के तहत मरीज़ लेने से कतराते हैं या 'अतिरिक्त ख़र्च' के नाम पर अलग से पैसे माँगते हैं। NITI Aayog की 2023 की समीक्षा रिपोर्ट ने ख़ुद माना था कि कई एम्पैनल्ड अस्पतालों में सेवाओं की गुणवत्ता और उपलब्धता में भारी अंतर है।
दूसरी — फ़र्ज़ी दावों का संकट। Comptroller and Auditor General (CAG) ने पिछले ऑडिट में आयुष्मान भारत में फ़र्ज़ी और डुप्लीकेट दावों की समस्या को चिन्हित किया था। लिमिट बढ़ने का मतलब है कि फ़र्ज़ीवाड़े का दायरा भी बढ़ सकता है — जब तक डिजिटल सत्यापन और अस्पताल ऑडिट सिस्टम मज़बूत नहीं होता।
तीसरी — राज्यों का हिस्सा। AB-PMJAY में ख़र्च का बँटवारा 60:40 (केंद्र:राज्य) के अनुपात में होता है। लिमिट दोगुनी करने का मतलब है राज्यों पर भी दोगुना वित्तीय बोझ। अभी भी कई राज्य अपना हिस्सा समय पर जारी नहीं कर पाते — ऐसे में 10 लाख का वादा काग़ज़ पर तो सुंदर दिखेगा, लेकिन ज़मीन पर अमल एक अलग कहानी होगी।
आगे क्या देखना है — और आपको क्या करना चाहिए
अगर आपके पास आयुष्मान कार्ड है, तो फ़िलहाल आपकी लिमिट 5 लाख रुपये प्रति परिवार प्रति वर्ष ही है — कोई बदलाव नहीं हुआ है। 70 वर्ष से ऊपर के बुज़ुर्ग अलग से 5 लाख के हक़दार हैं, यह अलग प्रावधान है।
इंडिया हेराल्ड की पॉलिसी रीड यह है: 2026 के बजट सत्र या उसके ठीक पहले इस प्रस्ताव पर कोई ठोस घोषणा आ सकती है — ख़ासकर इसलिए कि कई राज्यों में विधानसभा चुनाव नज़दीक हैं और स्वास्थ्य कवरेज एक शक्तिशाली चुनावी मुद्दा है। लेकिन जब तक NHA की अधिसूचना न आ जाए, किसी भी सोशल मीडिया पोस्ट को 'सरकारी फ़ैसला' मानने की ग़लती न करें।
असली सवाल यह नहीं है कि लिमिट 5 लाख रहेगी या 10 लाख होगी। असली सवाल यह है कि जिस अस्पताल में आप जाएँगे, वहाँ वह कार्ड चलेगा भी या नहीं — और अगर चलेगा, तो बिना अतिरिक्त जेब ख़र्च के? जब तक यह सवाल हल नहीं होता, लिमिट बढ़ाना एक ख़ूबसूरत सुर्ख़ी तो बनाएगा, मरीज़ के बिस्तर तक की राहत ज़रूरी नहीं।
यह रिपोर्ट पत्रकारिता है, चिकित्सा सलाह नहीं; किसी भी स्वास्थ्य संबंधी निर्णय के लिए योग्य चिकित्सक से परामर्श करें।
इंडिया हेराल्ड के संपादकीय मानकों के तहत AI सहायता से रिपोर्ट और लेखन; प्रकाशन का निर्णय मानव संपादक करते हैं।
मुख्य बातें
- आयुष्मान कार्ड की लिमिट अभी 5 लाख रुपये प्रति परिवार प्रति वर्ष है — 10 लाख करने का कोई आधिकारिक आदेश या अधिसूचना जारी नहीं हुई है।
- 70 वर्ष से ऊपर के सभी बुज़ुर्गों को 2024 से आयुष्मान कवर मिल रहा है — लेकिन उनकी लिमिट भी 5 लाख ही है, 10 लाख नहीं।
- WHO के अनुसार भारत में 5.5 करोड़ लोग हर साल स्वास्थ्य ख़र्चों से ग़रीबी में गिरते हैं — 5 लाख की सीमा गंभीर बीमारियों में अक्सर अपर्याप्त है।
- लिमिट बढ़ने पर भी पैकेज रेट, फ़र्ज़ी दावे और राज्यों के वित्तीय बोझ जैसी संरचनात्मक समस्याएँ बनी रहेंगी।
- बजट सत्र 2026 में इस प्रस्ताव पर घोषणा की संभावना है — लेकिन NHA अधिसूचना के बिना कोई बदलाव मान्य नहीं।
आँकड़ों में
- आयुष्मान भारत के तहत अब तक ~34 करोड़ कार्ड बने, 7 करोड़+ भर्ती दावे स्वीकृत — pmjay.gov.in
- WHO 2024: भारत में ~5.5 करोड़ लोग सालाना स्वास्थ्य ख़र्चों से ग़रीबी में धकेले जाते हैं
- लैंसेट ग्लोबल हेल्थ 2023: भारत में कैंसर इलाज का out-of-pocket ख़र्च ₹1.5-5.7 लाख/वर्ष
- AB-PMJAY ख़र्च बँटवारा 60:40 (केंद्र:राज्य) — लिमिट दोगुनी = राज्यों पर दोगुना बोझ
- 70+ बुज़ुर्ग विस्तार (सितंबर 2024): ~6 करोड़ अतिरिक्त लाभार्थी — PIB
छह सवाल: कौन, क्या, कब, कहाँ, क्यों, कैसे
- कौन: केंद्र सरकार का स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) — आयुष्मान भारत योजना के नोडल संस्थान।
- क्या: आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) की वार्षिक कवरेज लिमिट को 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये करने का प्रस्ताव चर्चा में है।
- कब: 2026 में सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के ज़रिये यह दावा वायरल हुआ; हालाँकि अब तक कोई आधिकारिक तिथि या अधिसूचना जारी नहीं है।
- कहाँ: यह योजना पूरे भारत में लागू है और 36 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में चलती है।
- क्यों: बढ़ती मेडिकल महँगाई, कैंसर-हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों का 5 लाख से कहीं ज़्यादा खर्च, और 70 वर्ष से ऊपर के बुज़ुर्गों की बढ़ती ज़रूरतें — ये प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं।
- कैसे: प्रस्ताव के अनुसार मौजूदा AB-PMJAY की वार्षिक सीमा को संशोधित अधिसूचना के ज़रिये दोगुना किया जाएगा; इसके लिए केंद्रीय बजट में अतिरिक्त आवंटन और राज्यों की सहमति आवश्यक होगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
आयुष्मान कार्ड की मौजूदा लिमिट कितनी है?
2026 में आयुष्मान भारत कार्ड (AB-PMJAY) की लिमिट 5 लाख रुपये प्रति परिवार प्रति वर्ष है। 10 लाख करने का कोई आधिकारिक आदेश अभी तक जारी नहीं हुआ है।
क्या 70 साल से ऊपर के बुज़ुर्गों को 10 लाख का कवर मिलता है?
नहीं। सितंबर 2024 से 70+ बुज़ुर्गों को आयुष्मान योजना में शामिल किया गया है, लेकिन उनकी कवरेज लिमिट भी 5 लाख रुपये ही है।
आयुष्मान कार्ड की लिमिट 10 लाख कब होगी?
अभी यह प्रस्ताव विचाराधीन है। कोई तिथि तय नहीं। बजट सत्र 2026 में घोषणा की संभावना जताई जा रही है, लेकिन NHA की अधिसूचना के बिना कोई बदलाव लागू नहीं होगा।
आयुष्मान कार्ड कैसे बनवाएँ?
नज़दीकी जन सेवा केंद्र (CSC), एम्पैनल्ड अस्पताल, या pmjay.gov.in पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है। आधार कार्ड और राशन कार्ड ज़रूरी दस्तावेज़ हैं।