गोलमाल 5 के नंबर्स, शेट्टी का इम्तिहान — 'कॉप यूनिवर्स' ने कॉमेडी किंग की अपनी कॉमेडी को खा लिया क्या?

Raj Harsh

गोलमाल 5 के शुरुआती बॉक्स ऑफिस नंबर्स रोहित शेट्टी की उम्मीदों से काफ़ी नीचे रहे हैं। ट्रेड रिपोर्ट्स के मुताबिक़ फ़िल्म ने ओपनिंग वीकेंड में वह रफ़्तार नहीं पकड़ी जो इस फ्रैंचाइज़ी के नाम से अपेक्षित थी — और इसकी सबसे बड़ी वजह कॉप यूनिवर्स द्वारा अजय देवगन की इमेज का 'सिंघमीकरण' है।

एक वक़्त था जब 'गोलमाल' का मतलब था — थिएटर में घुसो, दिमाग़ बाहर रखो, और डेढ़ घंटे पेट पकड़कर हँसो। 2006 से 2017 तक चार फ़िल्मों ने साबित किया कि रोहित शेट्टी सिर्फ़ कारें उड़ाना नहीं जानते, हँसाना भी जानते हैं। लेकिन गोलमाल 5 के शुरुआती बॉक्स ऑफिस नंबर्स एक ऐसी कहानी कह रहे हैं जो ख़ुद किसी कॉमेडी से कम विडंबनापूर्ण नहीं — कॉमेडी किंग की अपनी कॉमेडी फ्रैंचाइज़ी ने ही सबसे ठंडी ओपनिंग दे दी।

बॉलीवुड हंगामा की बॉक्स ऑफिस ट्रैकिंग के अनुसार गोलमाल 5 के डे-वाइज़ नंबर्स उस ट्रेजेक्टरी से साफ़ नीचे हैं जो इस फ्रैंचाइज़ी के पिछले भागों ने स्थापित की थी। गोलमाल अगेन (2017) ने अपने ओपनिंग वीकेंड में 87 करोड़ रुपये से ऊपर कमाए थे — एक ऐसा बेंचमार्क जिसे पाँचवाँ भाग छूना तो दूर, उसकी दिशा में चलता भी नहीं दिख रहा। ट्रेड हलकों में जो बात सबसे ज़्यादा हो रही है, वह सिर्फ़ 'फ्रैंचाइज़ी फटीग' नहीं है — वह कहीं ज़्यादा गहरी है।

जब सिंघम ने गोपाल को निगल लिया

अजय देवगन 2024-2025 में सिंघम अगेन के ज़रिए एक बार फिर बॉक्स ऑफिस पर गरजे। उस फ़िल्म ने 300 करोड़ के आसपास कमाई की और देवगन को जनता की स्मृति में 'बाजीराव सिंघम' के रूप में और गहरा बैठा दिया। समस्या यह है कि अब जब वही अजय देवगन 'गोपाल' बनकर आते हैं — वो मासूम, थोड़ा मूर्ख, हँसाने वाला किरदार — तो दर्शक का दिमाग़ ट्रांज़िशन नहीं कर पाता। ट्रेड विश्लेषकों के मुताबिक़ यह क्लासिक ब्रांड कैनिबलाइज़ेशन है: आपके एक प्रोडक्ट ने दूसरे को खा लिया।

यह सिर्फ़ देवगन की समस्या नहीं। रोहित शेट्टी ने पिछले पाँच-छह सालों में ख़ुद को 'कॉप यूनिवर्स' का आर्किटेक्ट के रूप में स्थापित किया — सूर्यवंशी, सिंघम अगेन, सर्कस (जो फ़्लॉप हुई लेकिन वह भी एक्शन-कॉमेडी थी)। उनका नाम अब 'कारों की उड़ान और पुलिस की गर्जना' का पर्याय है। जब ऐसे डायरेक्टर गोलमाल जैसी शुद्ध स्लैपस्टिक लेकर आते हैं, तो ऑडियंस को लगता है कि शायद इसमें भी कोई 'सिंघम कनेक्शन' होगा, कोई यूनिवर्स बिल्डिंग होगी — और जब वह नहीं मिलती, तो एक अजीब-सा disconnect पैदा होता है।

इनसाइड टॉक

इंडस्ट्री के भीतर की चर्चा और भी दिलचस्प है। सूत्रों के हवाले से बात यह है कि रोहित शेट्टी की टीम ने गोलमाल 5 को 'कॉप यूनिवर्स' से बिलकुल अलग रखने का फ़ैसला जानबूझकर किया था — ताकि साबित हो सके कि शेट्टी सिर्फ़ सिंघम वाले डायरेक्टर नहीं हैं। लेकिन ट्रेड हलकों में फुसफुसाहट है कि यह फ़ैसला उलटा पड़ गया: दर्शक को न तो सिंघम वाला एक्शन मिला, न ही 2006 वाली ताज़गी भरी कॉमेडी। वे एक तरह के 'no man's land' में फँस गए।

फ़ैन्स के बीच सोशल मीडिया पर एक और बात ज़ोर पकड़ रही है — क्या अजय देवगन अब 'हँसाने वाले हीरो' के बजाय 'डराने वाले हीरो' बन चुके हैं? यह सवाल सुनने में हल्का लगता है, लेकिन बॉक्स ऑफिस के नंबर इसे बेहद गंभीर बना देते हैं। (यह इंडस्ट्री चर्चा और अपुष्ट अटकलों पर आधारित है, पुष्ट तथ्य नहीं।)

मल्टीप्लेक्स vs सिंगल-स्क्रीन: दो अलग कहानियाँ

बॉलीवुड हंगामा के डेटा पैटर्न से एक और रोचक ट्रेंड उभरता है। गोलमाल फ्रैंचाइज़ी पारंपरिक रूप से सिंगल-स्क्रीन दर्शकों की फ़िल्म रही है — वो छोटे शहरों का मज़दूर, वो परिवार जो शनिवार की शाम सबसे सस्ती टिकट लेकर हँसने जाता है। लेकिन 2026 का सिंगल-स्क्रीन दर्शक बदल चुका है। उसके पास अब OTT है। वो 200 रुपये थिएटर में ख़र्च करने से पहले सोचता है — 'यही फ़िल्म दो महीने में Netflix पर आ जाएगी।' और कॉमेडी सबसे पहले इस OTT-wait कैटेगरी में गिरती है, क्योंकि कॉमेडी का 'बड़े पर्दे का अनुभव' एक्शन फ़िल्मों जितना ज़रूरी नहीं लगता।

मल्टीप्लेक्स में स्थिति थोड़ी बेहतर है, लेकिन वहाँ भी गोलमाल 5 को उन अर्बन दर्शकों से मुक़ाबला करना पड़ रहा है जो 'sophisticated' कॉमेडी की ओर शिफ़्ट हो चुके हैं — स्त्री 2, मुन्नाभाई 3 जैसी फ़िल्मों की माँग करने वाला दर्शक अब पुरानी स्लैपस्टिक को 'dated' मानने लगा है।

शेट्टी का असली इम्तिहान: फ्रैंचाइज़ी बचाएँ या यूनिवर्स?

इंडिया हेराल्ड का मानना है कि गोलमाल 5 के नंबर सिर्फ़ एक फ़िल्म की कहानी नहीं कह रहे — ये रोहित शेट्टी के पूरे कॅरियर आर्किटेक्चर पर सवाल खड़ा करते हैं। जैसा कि इंडिया हेराल्ड ने पहले विश्लेषण किया था, सिंघम की कामयाबी ने शेट्टी के लिए एक सुनहरा पिंजरा बना दिया है — बाहर निकलें तो ऑडियंस रूठती है, भीतर रहें तो बाक़ी सब फ्रैंचाइज़ी सूखती जाती है।

आने वाले हफ़्तों में अगर गोलमाल 5 word-of-mouth के दम पर टिकती है, तो यह साबित होगा कि कॉमेडी अभी ज़िंदा है — बस उसे पहले दिन का हाइप नहीं मिलता। लेकिन अगर दूसरे हफ़्ते में गिरावट तेज़ होती है, तो शेट्टी को एक कड़ा फ़ैसला लेना होगा: क्या गोलमाल 6 बनेगी, और अगर बनेगी तो क्या उसमें सिंघम का कोई cameo ठूँसना पड़ेगा सिर्फ़ इसलिए कि दर्शक अब 'शेट्टी = कॉप' मानता है? यह वही जाल है जिसमें Hollywood का MCU फँसा — हर फ़िल्म को यूनिवर्स से जोड़ना ज़रूरी हो गया, और standalone कहानियाँ मरने लगीं।

गोलमाल 5 के नंबर बता रहे हैं कि हिंदी बेल्ट का दर्शक अभी भी हँसना चाहता है — लेकिन वो तय नहीं कर पा रहा कि क्या वो उस आदमी पर हँस सकता है जिसे वो कल तक सलाम ठोकते देख रहा था।

यह रिपोर्ट इंडिया हेराल्ड के संपादकीय मानकों के तहत AI सहायता से तैयार की गई है; प्रकाशन का निर्णय मानव संपादक करते हैं।

मुख्य बातें

  • गोलमाल 5 का ओपनिंग गोलमाल अगेन (2017) के 87 करोड़+ वीकेंड से काफ़ी नीचे रहा — फ्रैंचाइज़ी का सबसे कमज़ोर ओपनिंग
  • कॉप यूनिवर्स ने अजय देवगन की इमेज को इस क़दर 'सिंघमीकरण' कर दिया कि दर्शक उन्हें कॉमेडी रोल में accept करने में हिचकिचा रहा है
  • सिंगल-स्क्रीन पर OTT-wait इफ़ेक्ट सबसे ज़्यादा कॉमेडी फ़िल्मों को मार रहा है — दर्शक मानता है कि हँसने के लिए बड़ा पर्दा ज़रूरी नहीं
  • अगर दूसरे हफ़्ते में गिरावट जारी रही तो गोलमाल 6 को यूनिवर्स से जोड़ना मजबूरी होगी — Hollywood के MCU वाले जाल की ओर एक और क़दम

आँकड़ों में

  • गोलमाल अगेन (2017) ने ओपनिंग वीकेंड में 87 करोड़+ कमाए थे — गोलमाल 5 इस बेंचमार्क से काफ़ी नीचे है (बॉलीवुड हंगामा ट्रैकिंग)
  • गोलमाल फ्रैंचाइज़ी की चार फ़िल्मों ने 2006 से 2017 के बीच कुल मिलाकर 500 करोड़+ कमाए — पाँचवें भाग में शुरुआती रुझान इस विरासत से मेल नहीं खाता

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