19 समझौते, एक रणनीतिक दांव — सीशेल्स में मोदी की यात्रा हिंद महासागर की भूराजनीति कैसे बदल रही है?

बिज़नेस स्टैंडर्ड के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी की सीशेल्स यात्रा में 19 द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर हुए — नौसैनिक सहयोग, MDA और जलवायु कार्रवाई सहित। विश्लेषकों का मानना है कि यह हिंद महासागर में चीन की 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' के जवाब में भारत का काउंटर-मूव है।

छह सवाल: कौन, क्या, कब, कहाँ, क्यों, कैसे

  • कौन: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सीशेल्स के राष्ट्रपति — दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व ने समझौतों पर हस्ताक्षर किए (बिज़नेस स्टैंडर्ड)।
  • क्या: सीशेल्स और भारत ने 19 द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर किए, जिसमें नौसैनिक सहयोग, जलवायु कार्रवाई और 'समावेशी विकास' का आह्वान शामिल (बिज़नेस स्टैंडर्ड)।
  • कब: 2026 में मोदी की सीशेल्स यात्रा के दौरान — जो किसी भारतीय प्रधानमंत्री की इस द्वीपीय देश की दुर्लभ यात्राओं में से एक है।
  • कहाँ: सीशेल्स — हिंद महासागर के पश्चिमी हिस्से में स्थित 115 द्वीपों का छोटा लेकिन रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण देश।
  • क्यों: हिंद महासागर में चीन की बढ़ती नौसैनिक उपस्थिति और 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' रणनीति का मुकाबला करने के लिए भारत को छोटे द्वीपीय देशों में अपनी पकड़ मज़बूत करनी ज़रूरी है।
  • कैसे: सॉफ्ट पावर (सांस्कृतिक कूटनीति, UPI), नौसैनिक सहयोग (संयुक्त गश्त, मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस), और विकास सहायता (बुनियादी ढाँचा, जलवायु वित्त) — तीन स्तरों पर एक साथ आगे बढ़ा गया।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • बिज़नेस स्टैंडर्ड के अनुसार भारत-सीशेल्स ने 19 द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर किए — नौसैनिक सहयोग, MDA, जलवायु कार्रवाई और सांस्कृतिक संबंध शामिल।
  • Assumption Island पर नौसैनिक अड्डे का प्रस्ताव 2018 में रुक गया था — 2026 के समझौते विश्लेषकों के अनुसार 'संयुक्त निगरानी सुविधा' मॉडल की ओर इशारा करते हैं।
  • मालदीव में बदली राजनीतिक स्थिति के बाद सीशेल्स भारत के हिंद महासागर नेटवर्क में और ज़्यादा महत्वपूर्ण हो गया है।
  • चीन की 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' के जवाब में भारत ने 'डायमंड नेकलेस' रणनीति अपनाई है — सीशेल्स उसकी सबसे ताज़ा कड़ी है।
  • UPI विस्तार, सांस्कृतिक केंद्र, और डायस्पोरा कूटनीति — भारत की सॉफ्ट पावर इस साझेदारी की एक अलग परत है।

एक नक्शा उठाइए। हिंद महासागर के बीचोबीच, अफ़्रीका के पूर्वी तट से क़रीब 1,500 किलोमीटर दूर, 115 छोटे-छोटे द्वीपों का एक झुंड दिखता है — सीशेल्स। आबादी एक लाख से कम। अर्थव्यवस्था का आकार भारत के किसी छोटे ज़िले जितना। लेकिन जब नरेंद्र मोदी इस देश में पैर रखते हैं, 19 समझौतों पर दस्तख़त करते हैं, और 'ब्लू होराइजन का संरक्षक' जैसी उपाधि लेकर लौटते हैं — तो बात औपचारिक कूटनीति से कहीं आगे निकल जाती है।

बिज़नेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार मोदी ने सीशेल्स में कहा — "भारत और सीशेल्स एक ऐसी दुनिया चाहते हैं जहाँ विकास ज़्यादा समावेशी हो।" सुनने में यह किसी भी शिखर सम्मेलन का मानक वाक्य लगता है। लेकिन इसे हिंद महासागर की भूराजनीति के संदर्भ में रखिए — तब इस एक वाक्य के पीछे का पूरा रणनीतिक गणित दिखने लगता है।

चीन की 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' — असली पृष्ठभूमि

पिछले दो दशकों में बीजिंग ने हिंद महासागर के किनारे-किनारे अपने बंदरगाहों की माला पिरोई है — पाकिस्तान का ग्वादर, श्रीलंका का हंबनटोटा, जिबूती का सैन्य अड्डा, और म्यांमार में गहरे पानी का बंदरगाह। रक्षा विश्लेषक इसे 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' कहते हैं — एक रणनीति जो भारत को उसके अपने महासागर में रणनीतिक रूप से संतुलित करने के लिए बनाई गई मानी जाती है। यूएस नेवल वॉर कॉलेज और IISS (इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फ़ॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज़) की रिपोर्टों के अनुसार चीन की नौसेना ने पिछले पाँच वर्षों में हिंद महासागर में अपनी तैनाती में उल्लेखनीय वृद्धि की है — कई विश्लेषक इसे तीन गुना तक बताते हैं, हालाँकि सटीक आँकड़े वर्गीकृत हैं।

इस घेराबंदी के जवाब में भारत ने अपनी 'डायमंड नेकलेस' या 'नेकलेस ऑफ फ़्रेंडशिप' रणनीति खड़ी की — ओमान, मेडागास्कर, मॉरीशस, और अब सीशेल्स जैसे छोटे देशों में रक्षा-विकास-सांस्कृतिक साझेदारी को एक साथ मज़बूत करना। उल्लेखनीय है कि चीन की सरकार ने भारत-सीशेल्स की इस बढ़ती साझेदारी पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है — बीजिंग आमतौर पर ऐसे द्विपक्षीय समझौतों पर सार्वजनिक टिप्पणी से बचता है, लेकिन चीनी सरकारी मीडिया ने अतीत में हिंद महासागर में 'बाहरी शक्तियों के सैन्यीकरण' की आलोचना की है।

Assumption Island — वो दांव जो अभी अधूरा है

2018 में मोदी और तत्कालीन सीशेल्स राष्ट्रपति डैनी फ़ॉर के बीच Assumption Island पर भारतीय नौसैनिक सुविधा बनाने का समझौता लगभग पक्का हो गया था। रॉयटर्स और द हिंदू की तत्कालीन रिपोर्टों के अनुसार सीशेल्स की विपक्षी पार्टियों ने इसे 'संप्रभुता पर ख़तरा' बताकर विधानसभा में रोक दिया — कुछ विश्लेषकों ने इसमें बाहरी प्रभाव की संभावना भी जताई थी, हालाँकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई। तब से यह प्रस्ताव भारतीय रणनीतिक हलकों में एक अधूरा अध्याय बना हुआ है।

2026 की यात्रा में Assumption Island का ज़िक्र सार्वजनिक बयानों में सीधे नहीं आया — लेकिन 19 समझौतों में जो नौसैनिक सहयोग, मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस (MDA), और संयुक्त गश्त की बातें हैं, उन्हें ध्यान से पढ़ें। विश्लेषकों का मानना है कि ये सब मिलकर वही परिचालन लाभ दे सकती हैं जो एक स्थायी सुविधा से मिलता — बिना 'बेस' शब्द बोले।

मालदीव का सबक — और सीशेल्स की बढ़ी कीमत

2023-24 में मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ू ने भारतीय सैन्य कर्मियों की वापसी की माँग की — उनकी सरकार ने इसे मालदीव की संप्रभुता और स्वतंत्र विदेश नीति का हिस्सा बताया, जबकि भारतीय रणनीतिक समुदाय ने इसे 'इंडिया आउट' नीति के रूप में देखा। मुइज़्ज़ू सरकार का कहना रहा है कि वे किसी एक देश के ख़िलाफ़ नहीं, बल्कि संतुलित विदेश नीति चाहते हैं — हालाँकि इसी दौरान चीन से उनकी क़रीबी बढ़ी, जिसने भारत के लिए चिंता पैदा की।

इसके बाद भारत के लिए सीशेल्स, मॉरीशस और मेडागास्कर जैसे वैकल्पिक ठिकाने और ज़्यादा अहम हो गए। UNCTAD (संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास सम्मेलन) के आँकड़ों के अनुसार हिंद महासागर की शिपिंग लेन से दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का लगभग एक तिहाई हिस्सा गुज़रता है — और सीशेल्स भौगोलिक रूप से इन मार्गों के बेहद क़रीब है, जो इसे रणनीतिक रूप से मालदीव से भी अधिक महत्वपूर्ण बनाता है।

UPI, सांस्कृतिक कूटनीति, और सॉफ्ट पावर का गणित

मोदी की सीशेल्स यात्रा में एक और परत है जिसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता — सॉफ्ट पावर। सीशेल्स की आबादी का एक बड़ा हिस्सा भारतीय मूल का है। बिज़नेस स्टैंडर्ड के अनुसार मोदी ने 'समावेशी विकास' की बात के साथ-साथ सांस्कृतिक जुड़ाव पर भी ज़ोर दिया। भारत की UPI पेमेंट्स प्रणाली का विस्तार, हिंदी और भारतीय सांस्कृतिक केंद्रों की स्थापना — ये वो निवेश हैं जो दीर्घकालिक जनसमर्थन बनाते हैं। जब कोई देश आपका खाना खाता है, आपकी पेमेंट ऐप से लेन-देन करता है, और आपकी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा महसूस करता है — तो द्विपक्षीय रिश्ते सरकारें बदलने पर भी टिके रहते हैं।

इंडिया हेराल्ड विश्लेषण: रणनीतिक पल्स

संपादकीय विश्लेषण: यह खंड इंडिया हेराल्ड का स्वतंत्र रणनीतिक आकलन है, जो सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी और रक्षा विशेषज्ञों की प्रकाशित टिप्पणियों पर आधारित है।

ऑब्ज़र्वर रिसर्च फ़ाउंडेशन (ORF) और कार्नेगी इंडिया जैसे थिंक टैंक के विश्लेषकों ने सवाल उठाया है कि 19 समझौतों के भीतर नौसैनिक सहयोग के दायरे की विस्तृत शर्तें अभी सार्वजनिक नहीं की गई हैं — और इसमें Assumption Island से जुड़ी किसी संयुक्त निगरानी सुविधा की संभावना हो सकती है। यह अनुमान है, आधिकारिक पुष्टि नहीं। दिल्ली के सामरिक गलियारों में चर्चा है कि भारत अब 'बेस' शब्द से बच रहा है और इसकी जगह 'कोस्टल सर्विलांस स्टेशन' या 'ज्वॉइंट मॉनिटरिंग फ़ैसिलिटी' जैसी भाषा इस्तेमाल कर रहा है — ताकि सीशेल्स के घरेलू विपक्ष को आपत्ति का आधार कम मिले।

रक्षा विशेषज्ञों के प्रकाशित विश्लेषणों के अनुसार मालदीव में हुए रणनीतिक नुकसान के बाद भारतीय नौसेना ने अपनी 'हब एंड स्पोक' रणनीति में सीशेल्स को प्राथमिकता दी है। यह रक्षा टिप्पणीकारों का आकलन है — सरकार ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

आगे क्या? — तीन बातें जो देखने लायक हैं

इंडिया हेराल्ड का स्पष्ट रणनीतिक आकलन यह है कि सीशेल्स यात्रा अकेली घटना नहीं, एक बड़ी शतरंज बिसात की चाल है। मोदी सरकार ने हिंद महासागर में 'संयुक्त सुविधा' मॉडल अपनाया प्रतीत होता है — संयुक्त गश्त, MDA सेंटर, कोस्टल रडार, और UPI-सांस्कृतिक गठजोड़ के ज़रिए वही परिचालन उपस्थिति हासिल करना जो एक स्थायी अड्डे से मिलती है, लेकिन बिना किसी देश की संप्रभुता पर सवाल उठने का मौक़ा दिए।

आने वाले महीनों में देखने लायक बातें:

  • पहली — क्या भारतीय नौसेना के जहाज़ सीशेल्स में ज़्यादा बार और ज़्यादा लंबे समय तक रुकने लगते हैं?
  • दूसरीAssumption Island पर किसी 'ग्रीन एनर्जी' या 'क्लाइमेट मॉनिटरिंग' प्रोजेक्ट के तहत कोई बुनियादी ढाँचा खड़ा होता है या नहीं?
  • तीसरीचीन इसका जवाब कैसे देता है — क्या बीजिंग सीशेल्स में अपना आर्थिक या विकास पैकेज बढ़ाता है?

हिंद महासागर में यह शतरंज धीमी चलती है, लेकिन हर मोहरे की कीमत बहुत बड़ी है। एक लाख से कम आबादी वाला यह छोटा-सा देश अब उस बिसात का सबसे गर्म ख़ाना बन गया है जहाँ दो एशियाई शक्तियाँ रणनीतिक बढ़त के लिए प्रतिस्पर्धा कर रही हैं।

आँकड़ों में

  • UNCTAD के अनुसार दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का लगभग एक तिहाई हिस्सा हिंद महासागर की शिपिंग लेन से गुज़रता है — जिसके क़रीब सीशेल्स की रणनीतिक स्थिति है।
  • सीशेल्स की आबादी एक लाख से कम है, लेकिन 2026 में भारत ने यहाँ 19 समझौतों पर दस्तख़त किए — यह किसी भी छोटे द्वीपीय राष्ट्र के साथ भारत के सबसे व्यापक पैकेज में से एक है (बिज़नेस स्टैंडर्ड)।
  • IISS और यूएस नेवल वॉर कॉलेज की रिपोर्टों के अनुसार चीन की नौसेना ने पिछले पाँच वर्षों में हिंद महासागर में तैनाती में उल्लेखनीय वृद्धि की है — कुछ विश्लेषक इसे तीन गुना तक बताते हैं।

मुख्य बातें

  • बिज़नेस स्टैंडर्ड के अनुसार भारत-सीशेल्स ने 19 द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर किए — नौसैनिक सहयोग, MDA, जलवायु कार्रवाई और सांस्कृतिक संबंध शामिल।
  • Assumption Island पर नौसैनिक सुविधा का प्रस्ताव 2018 में रुक गया (रॉयटर्स/द हिंदू) — 2026 के समझौते विश्लेषकों के अनुसार 'संयुक्त निगरानी सुविधा' मॉडल की ओर इशारा करते हैं।
  • मालदीव में बदली राजनीतिक स्थिति के बाद सीशेल्स भारत के हिंद महासागर नेटवर्क में और ज़्यादा महत्वपूर्ण हो गया है।
  • चीन की 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' के जवाब में भारत ने 'डायमंड नेकलेस' रणनीति अपनाई है — सीशेल्स उसकी सबसे ताज़ा कड़ी है।
  • चीन की सरकार ने इस साझेदारी पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सीशेल्स भारत के लिए रणनीतिक रूप से क्यों महत्वपूर्ण है?

सीशेल्स हिंद महासागर की उन प्रमुख शिपिंग लेन के नज़दीक है जहाँ से UNCTAD के अनुसार दुनिया का लगभग एक तिहाई समुद्री तेल व्यापार गुज़रता है। चीन की 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' रणनीति के ख़िलाफ़ भारत की काउंटर-स्ट्रैटेजी में सीशेल्स एक अहम कड़ी है।

Assumption Island पर भारतीय नौसैनिक सुविधा का क्या हुआ?

2018 में भारत-सीशेल्स के बीच Assumption Island पर सुविधा बनाने का समझौता लगभग तय था, लेकिन रॉयटर्स और द हिंदू की रिपोर्टों के अनुसार सीशेल्स के विपक्ष ने संप्रभुता का मुद्दा उठाकर इसे विधानसभा में रोक दिया। 2026 में भारत ने संयुक्त गश्त और MDA सेंटर जैसे वैकल्पिक मॉडल पर ध्यान केंद्रित किया है।

मालदीव से रिश्ते बदलने के बाद सीशेल्स की भूमिका कैसे बदली?

मालदीव के राष्ट्रपति मुइज़्ज़ू ने भारतीय सैन्य कर्मियों की वापसी की माँग की — उनकी सरकार ने इसे संप्रभुता का मामला बताया। इसके बाद भारत के लिए सीशेल्स, मॉरीशस और मेडागास्कर जैसे देश 'हब एंड स्पोक' रणनीति में ज़्यादा महत्वपूर्ण हो गए।

भारत-सीशेल्स के बीच 2026 में कितने समझौते हुए?

बिज़नेस स्टैंडर्ड के अनुसार भारत और सीशेल्स ने 19 द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर किए, जिसमें नौसैनिक सहयोग, मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस, जलवायु कार्रवाई, और सांस्कृतिक संबंध शामिल हैं।

चीन की 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' और भारत की 'डायमंड नेकलेस' रणनीति क्या है?

'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' चीन की वो रणनीति मानी जाती है जिसमें ग्वादर, हंबनटोटा, जिबूती जैसे बंदरगाहों के ज़रिए हिंद महासागर में उपस्थिति बढ़ाई गई है। जवाब में भारत ने ओमान, मॉरीशस, सीशेल्स जैसे देशों से मिलकर 'डायमंड नेकलेस' बनाई — रक्षा, विकास और सांस्कृतिक साझेदारी का बहुस्तरीय गठबंधन। चीन इन बंदरगाहों को व्यापारिक परियोजनाएँ बताता है, सैन्य घेराबंदी नहीं।

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