राजस्थान में UCC का शोर — भजनलाल सरकार गवर्नेंस छुपा रही है या 2027 का 'असली हथियार' तैयार कर रही है?

Singh Anchala

राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भजनलाल शर्मा सरकार पर आरोप लगाया है कि UCC को गवर्नेंस की नाकामी से ध्यान भटकाने और संवैधानिक मूल्यों पर हमला करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। यह दाँव 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है।

राजस्थान में UCC पर डोटासरा का आरोप है कि भजनलाल सरकार गवर्नेंस की विफलता को छुपाने के लिए इसे ढाल बना रही है — लेकिन इस शोर के पीछे जो सियासी शतरंज बिछ रही है, वह 2027 की लड़ाई का ड्रेस रिहर्सल है। जब किसी राज्य की सरकार अपने ढाई साल के कार्यकाल में सड़कों पर न बिजली की समस्या सुलझा पाई हो, न बेरोज़गारी के आँकड़ों को नीचे ला पाई हो, तो वह अचानक 'समान नागरिक संहिता' का बिगुल क्यों बजाती है? कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा का ठीक यही सवाल है — और इसका जवाब राजस्थान की गलियों से ज़्यादा दिल्ली के पार्टी हेडक्वार्टर में छुपा है।

डोटासरा ने सीधे शब्दों में कहा है कि भजनलाल शर्मा सरकार UCC को गवर्नेंस की नाकामी से ध्यान भटकाने के हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही है और यह संवैधानिक मूल्यों पर सीधा हमला है। उनका आरोप है कि जब किसान परेशान हैं, युवा नौकरी के लिए भटक रहे हैं और महँगाई से आम आदमी की रसोई जल रही है, तब सरकार का फ़ोकस UCC पर शिफ़्ट करना एक सोची-समझी रणनीति है — जनता के दर्द को नज़रअंदाज़ करने की।

लेकिन BJP की तरफ़ से तर्क बिलकुल उलटा है। भजनलाल सरकार और प्रदेश BJP नेतृत्व का कहना है कि UCC संविधान के अनुच्छेद 44 में निर्देशक सिद्धांत के तहत आता है और यह 'सबके लिए एक क़ानून' का वादा पूरा करना है, न कि किसी समुदाय विशेष को निशाना बनाना। BJP का तर्क है कि उत्तराखंड में UCC लागू होने के बाद राजस्थान इसे अपनाने वाला अगला स्वाभाविक राज्य है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उत्तराखंड में UCC लागू होने के बाद BJP ने कई अन्य राज्यों में भी इसे दोहराने की रणनीति बनाई है, और राजस्थान इस सूची में सबसे ऊपर बताया जाता है।

यहीं पर सियासी गणित दिलचस्प होता है। राजस्थान में 2023 में BJP ने 115 सीटें जीतकर सत्ता हासिल की थी, लेकिन यह जीत मुख्यतः 'एंटी-इनकम्बेंसी' की लहर पर सवार थी, न कि किसी वैचारिक जनादेश पर। अब जब 2027 का चुनाव करीब आ रहा है और सरकार के ख़िलाफ़ 'गवर्नेंस गैप' की शिकायतें बढ़ रही हैं, तो UCC का कार्ड टेबल पर आना महज़ संयोग नहीं लगता।

पॉलिटिकल पल्स

सियासी गलियारों में फुसफुसाहट यह है कि UCC राजस्थान में BJP के लिए दोहरा काम कर सकता है — एक तरफ़ हिंदू वोट बैंक को कंसॉलिडेट करना, दूसरी तरफ़ OBC और मुस्लिम वोट में दरार डालना। राजस्थान में OBC वोट बैंक — विशेषकर जाट, गूजर, मीणा समुदाय — चुनाव की धुरी है। इन समुदायों में UCC को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएँ हैं: एक तबका इसे 'बराबरी का क़ानून' मानता है, दूसरा इसे अपनी सांस्कृतिक परंपराओं पर हमला समझता है। BJP की गणना यह प्रतीत होती है कि अगर यह मुद्दा चुनाव तक गर्म रहे, तो विपक्ष की एकजुटता टूटती है।

दूसरी तरफ़, कांग्रेस के भीतर भी UCC पर एक स्वर नहीं है। पार्टी का आधिकारिक रुख इसके ख़िलाफ़ है, लेकिन ज़मीन पर कई कांग्रेसी नेता खुलकर विरोध करने से बचते हैं — क्योंकि 'हिंदू वोट' खोने का डर उन्हें भी सताता है। डोटासरा इसीलिए 'गवर्नेंस फ़ेल्योर' का फ़्रेम चुन रहे हैं, न कि सीधे UCC का विरोध — यह कांग्रेस की काउंटर-स्ट्रैटेजी का सबसे सुरक्षित रास्ता है।

(यह राजनीतिक विश्लेषण और हलकों की चर्चा पर आधारित है, पुष्ट तथ्य नहीं।)

इस सियासी बिसात के पीछे की असली चाल को इंडिया हेराल्ड का पॉलिटिकल रीड यह है कि राजस्थान दरअसल BJP की 'UCC लैब' बन रहा है — जिस तरह उत्तराखंड पहला प्रयोग था, राजस्थान दूसरा है। अगर यहाँ UCC चुनावी फ़ायदा देता है, तो 2029 लोकसभा से पहले मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और शायद गुजरात में भी यही कार्ड खेला जा सकता है। लेकिन अगर ज़मीनी विरोध बढ़ा — ख़ासतौर पर OBC समुदायों और आदिवासी क्षेत्रों में — तो यही कार्ड BJP के लिए बूमरैंग भी बन सकता है।

डोटासरा का 'संवैधानिक मूल्यों पर हमला' वाला फ़्रेम भी गौर करने लायक है। कांग्रेस जानती है कि सीधे 'मुस्लिम मुद्दा' कहने से हिंदू वोट बैंक नाराज़ होता है, इसलिए वह संविधान की ढाल ओढ़ रही है। यह वही रणनीति है जो CAA विरोध के दौरान अपनाई गई थी — और उसमें कांग्रेस को सीमित सफलता ही मिली थी।

आने वाले हफ़्तों में देखने लायक यह होगा कि क्या भजनलाल सरकार UCC पर कोई ठोस विधेयक लाती है या यह चर्चा के स्तर पर ही रहता है। अगर विधेयक आता है, तो विपक्ष के लिए सड़क से लेकर सदन तक लड़ाई का मैदान खुलेगा। अगर नहीं आता, तो यह साबित हो जाएगा कि UCC महज़ चुनावी शोर था — और डोटासरा का 'ध्यान भटकाने' वाला आरोप सही निकलेगा।

राजस्थान की गर्म रेत पर UCC की यह बहस दरअसल एक बड़े सवाल की परछाई है: क्या भारतीय लोकतंत्र में नीति (पॉलिसी) और राजनीति (पॉलिटिक्स) के बीच की लकीर पूरी तरह मिट चुकी है? जब हर क़ानून पहले चुनावी कैलकुलेटर से गुज़रता हो, तो जनता को उस क़ानून के इरादे पर भरोसा कैसे हो?

आरोपों की यह रिपोर्टिंग नामित स्रोतों पर आधारित है और जब तक अदालत ने फ़ैसला न दिया हो, उन्हें अप्रमाणित माना जाना चाहिए; न्यायालय में लंबित मामलों की रिपोर्टिंग बिना पूर्वाग्रह के की गई है।

इंडिया हेराल्ड के संपादकीय मानकों के तहत AI सहायता से रिपोर्ट और लेखन; प्रकाशन का निर्णय मानव संपादक करते हैं।

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मुख्य बातें

  • डोटासरा का मुख्य आरोप: भजनलाल सरकार UCC को गवर्नेंस की नाकामी से ध्यान भटकाने के लिए इस्तेमाल कर रही है — महँगाई, बेरोज़गारी जैसे असल मुद्दे अनसुलझे हैं।
  • BJP का तर्क: UCC अनुच्छेद 44 का संवैधानिक वादा है, उत्तराखंड के बाद राजस्थान अगला स्वाभाविक क़दम है।
  • 2027 का चुनावी गणित: UCC से OBC-मुस्लिम वोट बैंक में दरार डालना और हिंदू वोट कंसॉलिडेट करना BJP की संभावित रणनीति दिखती है।
  • कांग्रेस की काउंटर-स्ट्रैटेजी: सीधे UCC विरोध की जगह 'गवर्नेंस फ़ेल्योर' का सुरक्षित फ़्रेम चुना गया है।
  • राजस्थान BJP की 'UCC लैब' बन रहा है — सफल हुआ तो MP, छत्तीसगढ़ में दोहराया जाएगा, नाकाम हुआ तो बूमरैंग बनेगा।

आँकड़ों में

  • 2023 राजस्थान विधानसभा में BJP ने 115 सीटें जीतीं — मुख्यतः एंटी-इनकम्बेंसी पर, वैचारिक जनादेश पर नहीं।
  • संविधान का अनुच्छेद 44 राज्य के नीति-निर्देशक सिद्धांतों में समान नागरिक संहिता का प्रावधान करता है।
  • उत्तराखंड UCC लागू करने वाला पहला भारतीय राज्य बना, जिसके बाद BJP ने अन्य राज्यों में इसे दोहराने की रणनीति बनाई।

छह सवाल: कौन, क्या, कब, कहाँ, क्यों, कैसे

  • कौन: राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की BJP सरकार।
  • क्या: डोटासरा ने आरोप लगाया कि राजस्थान सरकार UCC (समान नागरिक संहिता) का इस्तेमाल गवर्नेंस फ़ेल्योर छुपाने और संवैधानिक मूल्यों पर हमले के लिए कर रही है।
  • कब: जून 2026 — राजस्थान में UCC लागू करने की चर्चा तेज़ होने के बीच।
  • कहाँ: राजस्थान — जहाँ भजनलाल शर्मा की BJP सरकार सत्ता में है।
  • क्यों: डोटासरा के अनुसार सरकार महँगाई, बेरोज़गारी और क़ानून-व्यवस्था जैसे असली मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए UCC का सहारा ले रही है।
  • कैसे: कांग्रेस का तर्क है कि BJP राजस्थान को UCC की 'प्रयोगशाला' बनाकर 2027 चुनाव से पहले हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण की ज़मीन तैयार कर रही है, जबकि BJP इसे 'सबके लिए एक क़ानून' की संवैधानिक ज़रूरत बताती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

राजस्थान में UCC लागू करने की चर्चा क्यों तेज़ हुई है?

उत्तराखंड में UCC लागू होने के बाद BJP ने अन्य शासित राज्यों में भी इसे दोहराने की योजना बनाई है। राजस्थान में 2027 विधानसभा चुनाव नज़दीक आने के साथ BJP इसे वैचारिक एजेंडे के रूप में आगे बढ़ा रही है।

डोटासरा ने UCC पर क्या आरोप लगाया है?

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा है कि भजनलाल शर्मा सरकार UCC का इस्तेमाल गवर्नेंस की नाकामी — महँगाई, बेरोज़गारी, क़ानून-व्यवस्था — से ध्यान भटकाने के लिए कर रही है और यह संवैधानिक मूल्यों पर हमला है।

UCC का 2027 राजस्थान चुनाव पर क्या असर हो सकता है?

विश्लेषकों का मानना है कि UCC हिंदू वोट कंसॉलिडेशन और OBC-मुस्लिम वोट बैंक में दरार दोनों का काम कर सकता है। हालाँकि OBC और आदिवासी समुदायों में ज़मीनी विरोध बढ़ा तो यह BJP के लिए बूमरैंग भी साबित हो सकता है।

क्या भारतीय संविधान में UCC का प्रावधान है?

हाँ, अनुच्छेद 44 राज्य के नीति-निर्देशक सिद्धांतों में समान नागरिक संहिता लागू करने का निर्देश देता है, हालाँकि यह बाध्यकारी नहीं बल्कि मार्गदर्शक प्रावधान है।

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