अजित पवार 'ऑप्शन' तोल रहे हैं — क्या NDA में रहकर शरद पवार से बैकडोर बात चल रही है?
अजित पवार NDA में रहते हुए भी शरद पवार कैंप से बैकचैनल संपर्क बनाए रखने की चर्चा है। CAG के ₹3,541 करोड़ के लाडकी बहीन ऑडिट बम, शिंदे सरकार पर बढ़ते दबाव और 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी — ये तीनों मिलकर अजित की 'ऑप्शन' रणनीति को समझाते हैं।
अजित पवार जब चुप रहते हैं, तो महाराष्ट्र की राजनीति सबसे ज़्यादा शोर मचाती है। NDA में रहते हुए शरद पवार कैंप से बैकचैनल संपर्क की चर्चा — यह मामूली गॉसिप नहीं, बल्कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की सबसे बड़ी सियासी पहेली है। News18 की ताज़ा रिपोर्ट ने इस सवाल को फिर से ज़िंदा कर दिया है: क्या अजित पवार सचमुच NDA छोड़ने की ज़मीन तैयार कर रहे हैं?
सतह पर देखें तो अजित पवार उपमुख्यमंत्री हैं, महायुति गठबंधन के तीसरे स्तंभ हैं, और एकनाथ शिंदे सरकार में बाक़ायदा बैठे हैं। लेकिन सतह के नीचे की कहानी बिलकुल अलग है। News18 के अनुसार, पार्टी सूत्रों का कहना है कि अजित पवार के नज़दीकी नेता शरद पवार खेमे के लोगों से ग़ैर-रस्मी बातचीत बनाए हुए हैं। यह 'ऑप्शन तोलना' है — एक ऐसा खेल जो पवार ख़ानदान की सियासी DNA में है।
अब इसमें जोड़िए CAG का वो बम जो शिंदे सरकार की नींव हिला रहा है। The Hindu की रिपोर्ट के मुताबिक़, लाडकी बहीन योजना पर CAG ने ₹3,541 करोड़ की अनियमितताओं पर गंभीर सवाल उठाए हैं। यह वही योजना है जिसे शिंदे सरकार ने 2024 विधानसभा चुनाव से पहले अपना सबसे बड़ा दांव बनाया था — हर महीने ₹1,500 सीधे महिलाओं के खाते में। वोट तो आए, लेकिन अब ऑडिट कह रहा है कि इस उदारता की क़ीमत पारदर्शिता ने चुकाई।
पॉलिटिकल पल्स
सियासी गलियारों में फुसफुसाहट यह है कि अजित पवार को एक साथ दो चीज़ें दिख रही हैं — पहली, शिंदे सरकार पर CAG ऑडिट का बढ़ता दबाव जो 2027 तक और तीखा होगा; दूसरी, NDA के भीतर उनकी अपनी सौदेबाज़ी की ताक़त लगातार सिकुड़ रही है। 2024 विधानसभा चुनाव में NCP (अजित पवार गुट) की सीटें उम्मीद से कम आईं, और BJP के भीतर एक धारा पहले से कह रही थी कि अजित को उतना स्पेस देने की ज़रूरत नहीं जितना 2023 में दिया गया था।
(यह इंडस्ट्री चर्चा और अपुष्ट अटकलों पर आधारित है, पुष्ट तथ्य नहीं।)
ट्रेड हलकों में चर्चा है कि अजित पवार का कैलकुलेशन बिलकुल साफ़ है: अगर 2027 तक शिंदे सरकार CAG ऑडिट, विपक्ष के हमलों और आंतरिक कलह से कमज़ोर होती है, तो NDA का जहाज़ डूबने से पहले उतर जाना समझदारी है। और अगर शरद पवार से बैकडोर खुला है, तो लौटने का रास्ता भी तैयार है। विश्लेषकों का अनुमान है कि शरद पवार ख़ुद इस बैकचैनल को पूरी तरह बंद करने में कोई दिलचस्पी नहीं रखते — क्योंकि अजित की वापसी से NCP का 'असली बनाम नक़ली' वाला नैरेटिव ख़त्म हो जाता है, और मराठा वोट बैंक फिर एक छत के नीचे आ जाता है।
लेकिन इस पूरे खेल में एक ऐसा पहलू है जो बाक़ी मीडिया से छूट रहा है, और जिसे इंडिया हेराल्ड सीधे सामने रख रहा है। अजित पवार का असली लीवरेज न NDA में है और न MVA में — वो ₹3,541 करोड़ के CAG ऑडिट में छिपा है। अजित पवार इस वक़्त उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री दोनों हैं। लाडकी बहीन योजना पर अगर विपक्ष विधानसभा में CAG रिपोर्ट पर बहस की माँग करता है — जो MVA ज़रूर करेगा — तो शिंदे को जवाब देना होगा, लेकिन असली सवाल अजित के वित्त विभाग पर भी आएँगे। यहाँ अजित के पास दो रास्ते हैं: या तो शिंदे के साथ खड़े होकर ऑडिट का बचाव करें और ख़ुद भी दागी हों, या फिर चुपचाप दूरी बनाकर यह संदेश दें कि 'यह शिंदे की योजना थी, मेरी नहीं।' दूसरा रास्ता NDA से निकलने का बहाना भी बन सकता है।
₹3,541 करोड़ — इस संख्या को याद रखिए। यह सिर्फ़ एक ऑडिट का आँकड़ा नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की अगली सरकार का नक़्शा तय करने वाला नंबर हो सकता है। The Hindu के अनुसार, CAG ने पाया कि योजना में लाभार्थियों के सत्यापन, फंड वितरण और दोहरे भुगतान को लेकर गंभीर ख़ामियाँ थीं। अगर यह रिपोर्ट विधानसभा में टेबल होती है, तो शिंदे सरकार का सबसे बड़ा चुनावी दांव उसका सबसे बड़ा बोझ बन जाएगा।
शरद पवार — 85 साल की उम्र में भी महाराष्ट्र के सबसे पैने सियासी दिमाग़ — इस स्थिति को बख़ूबी समझते हैं। News18 की रिपोर्ट में एक दिलचस्प बात है: शरद पवार ने हाल के किसी भी सार्वजनिक बयान में अजित पवार पर सीधा निजी हमला नहीं किया। पार्टी विभाजन पर बात की, विचारधारा पर बात की, BJP पर हमला किया — लेकिन अजित को व्यक्तिगत रूप से निशाना नहीं बनाया। यह चुप्पी राजनीति में सबसे बड़ा संकेत होती है — दरवाज़ा खुला है।
दूसरी तरफ़, अजित पवार की तरफ़ से अब तक इन रिपोर्ट्स पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। न बैकचैनल की बात का खंडन, न NDA में अटूट निष्ठा का ऐलान। यह चुप्पी अपने आप में एक बयान है।
अब सवाल यह है कि BJP इस खेल को कब तक देखती रहेगी। देवेंद्र फडणवीस, जो 2024 में शिंदे सरकार के असली आर्किटेक्ट रहे, जानते हैं कि अजित पवार बिना NCP के विधायकों के भी BJP के लिए ज़्यादा ख़तरनाक हो सकते हैं — क्योंकि अगर अजित MVA में लौटते हैं, तो पश्चिमी महाराष्ट्र का मराठा वोट बैंक — जो अभी बँटा हुआ है — फिर से एक हो जाएगा। और एकजुट मराठा वोट बैंक + दलित-मुस्लिम-OBC गठबंधन = BJP के लिए 2027 में करारी हार का फ़ॉर्मूला।
तो असली खेल यह है: अजित पवार इस वक़्त NDA में बैठकर अपनी क़ीमत बढ़ा रहे हैं। जितनी ज़्यादा BJP को उनके जाने का डर, उतना ज़्यादा स्पेस। और जितना ज़्यादा शरद पवार से बैकचैनल की ख़बरें आएँ, उतना ज़्यादा BJP पर दबाव कि अजित को और रियायतें दो। यह दोतरफ़ा नीलामी है — और अजित पवार दोनों तरफ़ बोली लगा रहे हैं।
2027 अभी डेढ़ साल दूर है। लेकिन महाराष्ट्र की राजनीति में डेढ़ साल में ज़लज़ले आते हैं — 2019 की रात की शपथ याद कीजिए। सवाल यह नहीं कि अजित पवार NDA छोड़ेंगे या नहीं — सवाल यह है कि छोड़ने की क़ीमत कितनी ऊँची लगाएँगे, और कौन पहले झुकेगा।
यहाँ रिपोर्ट किए गए आरोप नामित स्रोतों के हवाले से हैं और जब तक अदालत का फ़ैसला न आए, अप्रमाणित हैं; न्यायालय में विचाराधीन मामलों की रिपोर्टिंग बिना पूर्वाग्रह के की गई है।
इंडिया हेराल्ड के संपादकीय मानकों के तहत AI सहायता से रिपोर्ट और लेखन; प्रकाशन का निर्णय मानव संपादक करते हैं।
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मुख्य बातें
- अजित पवार NDA में रहते हुए भी शरद पवार कैंप से बैकचैनल संपर्क की चर्चा — News18 रिपोर्ट के अनुसार पार्टी सूत्रों का दावा
- CAG ने लाडकी बहीन योजना पर ₹3,541 करोड़ की अनियमितता के सवाल उठाए — The Hindu के अनुसार यह शिंदे सरकार का सबसे बड़ा सिरदर्द
- अजित पवार की दोहरी भूमिका (उपमुख्यमंत्री + वित्त मंत्री) उन्हें CAG ऑडिट पर NDA का बचाव करने या दूरी बनाकर निकलने — दोनों का विकल्प देती है
- शरद पवार का अजित पर सीधा निजी हमला न करना — दरवाज़ा खुला रखने का सबसे बड़ा संकेत
- अगर अजित MVA में लौटते हैं तो पश्चिमी महाराष्ट्र का बँटा मराठा वोट फिर एकजुट — BJP के लिए 2027 में सबसे बड़ा ख़तरा
आँकड़ों में
- CAG ने लाडकी बहीन योजना पर ₹3,541 करोड़ की अनियमितता के सवाल उठाए — The Hindu
- अजित पवार NDA में उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री — दोनों पद एक साथ, जो उन्हें CAG ऑडिट पर अनूठी स्थिति में रखते हैं
- 2027 महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से लगभग डेढ़ साल बाक़ी — गठबंधन पुनर्गठन की खिड़की खुली
छह सवाल: कौन, क्या, कब, कहाँ, क्यों, कैसे
- कौन: NCP (अजित पवार गुट) प्रमुख और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार, NCP-शरदचंद्र पवार पार्टी प्रमुख शरद पवार, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे
- क्या: अजित पवार पर NDA में रहते हुए शरद पवार कैंप से बैकचैनल बातचीत जारी रखने के आरोप — News18 रिपोर्ट के अनुसार
- कब: जून 2026, 2027 महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से लगभग डेढ़ साल पहले
- कहाँ: महाराष्ट्र, मुंबई — राज्य की सत्ता राजनीति का केंद्र
- क्यों: CAG ऑडिट से लाडकी बहीन योजना पर ₹3,541 करोड़ के अनियमितता के सवाल, शिंदे सरकार पर बढ़ता दबाव, और NDA में अजित पवार की घटती सौदेबाज़ी की ताक़त — The Hindu और News18 रिपोर्ट्स के अनुसार
- कैसे: पार्टी सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि अजित पवार के करीबी लोग शरद पवार खेमे के नेताओं से अनौपचारिक संपर्क बनाए हुए हैं — News18 रिपोर्ट
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अजित पवार NDA क्यों छोड़ सकते हैं?
CAG के ₹3,541 करोड़ के लाडकी बहीन ऑडिट से शिंदे सरकार पर बढ़ता दबाव, NDA में अजित की घटती सौदेबाज़ी की ताक़त, और 2027 विधानसभा से पहले बेहतर विकल्प तलाशने की रणनीति — ये तीनों कारण हैं।
शरद पवार और अजित पवार के बीच बैकचैनल बातचीत की क्या स्थिति है?
News18 की रिपोर्ट के अनुसार पार्टी सूत्रों का कहना है कि अजित के करीबी नेता शरद पवार खेमे से अनौपचारिक संपर्क बनाए हुए हैं, हालाँकि अजित पवार की तरफ़ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
CAG ने लाडकी बहीन योजना पर क्या आपत्तियाँ उठाईं?
The Hindu के अनुसार CAG ने ₹3,541 करोड़ की अनियमितताओं पर सवाल उठाए — इनमें लाभार्थियों के सत्यापन, फंड वितरण और दोहरे भुगतान की गंभीर ख़ामियाँ शामिल हैं।
अजित पवार के NDA छोड़ने से BJP पर क्या असर होगा?
अगर अजित MVA में लौटते हैं तो पश्चिमी महाराष्ट्र का बँटा मराठा वोट बैंक फिर एकजुट हो सकता है — यह दलित-मुस्लिम-OBC गठबंधन के साथ मिलकर 2027 में BJP के लिए सबसे बड़ा चुनावी ख़तरा बन सकता है।