कर्नाटक में BJP का 'गृहयुद्ध' — क्या विजयेंद्र को हटाना मोदी-शाह के लिए भी फंदा है?

Singh Anchala

कर्नाटक BJP में बी.वाई. विजयेंद्र के अध्यक्ष पद से हटाने की माँग बागी नेताओं ने तेज़ कर दी है। उपचुनाव में पार्टी की खराब कारगुज़ारी बहाना है, असल लड़ाई लिंगायत वोटबैंक और परिवारवाद पर नियंत्रण की है। दिल्ली हाईकमान की चुप्पी रणनीतिक है — जल्दबाज़ी येदियुरप्पा को नाराज़ करेगी, देरी बागियों को।

एक पिता जिसने कर्नाटक की सत्ता पर दशकों राज किया, और एक बेटा जिसे पार्टी की कमान सौंपी गई — लेकिन अब उसी पार्टी के अंदर से आवाज़ उठ रही है: 'बेटे को हटाओ।' कर्नाटक BJP का यह 'गृहयुद्ध' महज़ एक प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी का मामला नहीं — यह दक्षिण भारत में भगवा पार्टी की सबसे बड़ी जाति-राजनीतिक ज़मीन, लिंगायत वोटबैंक, पर कब्ज़े की लड़ाई है।

News18 की रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक उपचुनाव 2024 में BJP की निराशाजनक कारगुज़ारी के बाद पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने खुलकर प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र को हटाने की माँग कर दी है। बागी गुट का कहना है कि विजयेंद्र के नेतृत्व में संगठन कमज़ोर हुआ और ज़मीनी कार्यकर्ता हतोत्साहित हुए। लेकिन इस बगावत के पीछे सिर्फ़ चुनावी हार नहीं — इसमें वर्षों पुरानी गुटबाज़ी, सीनियर नेताओं की उपेक्षा और परिवारवाद का गहरा ज़ख्म है।

विजयेंद्र पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा के पुत्र हैं। येदियुरप्पा कर्नाटक में BJP के सबसे बड़े लिंगायत चेहरे रहे हैं — वह एकमात्र नेता हैं जिन्होंने दक्षिण में पार्टी को बहुमत दिलाया। जब विजयेंद्र को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया, तो संदेश साफ़ था: येदियुरप्पा की विरासत को अगली पीढ़ी में बाँधना है। लेकिन विरासत और योग्यता के बीच का अंतर राजनीति में जल्दी दिखता है।

पॉलिटिकल पल्स

कर्नाटक BJP के गलियारों में फुसफुसाहट है कि बगावत सिर्फ़ विजयेंद्र के ख़िलाफ़ नहीं, बल्कि येदियुरप्पा परिवार के 'राजनीतिक साम्राज्य' के ख़िलाफ़ है। पार्टी के कई ओबीसी और दलित नेताओं को लगता है कि लिंगायत वर्चस्व ने उनकी जगह सिकोड़ी है। सियासी हलकों में चर्चा है कि कुछ बागी नेताओं ने दिल्ली हाईकमान को लिखित शिकायत भेजी है जिसमें विजयेंद्र के 'एकपक्षीय फ़ैसलों' और 'टिकट बँटवारे में भाई-भतीजावाद' का ज़िक्र है। एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा — 'पार्टी किसी एक परिवार की जागीर नहीं है।' (यह इंडस्ट्री चर्चा और राजनीतिक गलियारों की अपुष्ट जानकारी पर आधारित है, पुष्ट तथ्य नहीं।)

लेकिन सबसे दिलचस्प अध्याय दिल्ली में लिखा जा रहा है — वह है हाईकमान की ख़ामोशी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने इस बगावत पर अब तक कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है। News18 की रिपोर्ट में भी दिल्ली की ओर से किसी स्पष्ट रुख का ज़िक्र नहीं है। यह चुप्पी आकस्मिक नहीं — यह गणित है।

समझिए: अगर दिल्ली विजयेंद्र को फ़ौरन हटाती है, तो येदियुरप्पा नाराज़ होते हैं — और नाराज़ येदियुरप्पा का मतलब है लिंगायत वोटबैंक में दरार। कर्नाटक में लिंगायत समुदाय लगभग 17% आबादी है और BJP के सबसे भरोसेमंद वोटर बेस में से एक। ज़रा सोचिए — 2018 में येदियुरप्पा के दम पर ही BJP सबसे बड़ी पार्टी बनी थी, भले ही सरकार बनाने में दिक्कत आई। दूसरी तरफ़, अगर हाईकमान बागियों को नज़रअंदाज़ करती है, तो ओबीसी-दलित और गैर-लिंगायत कैडर और भी खिसकेगा।

इंडिया हेराल्ड का पॉलिटिकल रीड यह है कि दिल्ली की चुप्पी एक 'वेट एंड वॉच' रणनीति है — हाईकमान शायद 2028 कर्नाटक विधानसभा चुनाव से पहले किसी 'नैचुरल एग्ज़िट' का इंतज़ार कर रही है, जहाँ विजयेंद्र को बिना अपमानित किए बदला जा सके और येदियुरप्पा को कोई 'सम्मानजनक विकल्प' दिया जा सके। लेकिन यह रणनीति तभी काम करेगी जब बागी गुट इतने दिन सब्र रखे — और कर्नाटक की ज़मीनी राजनीति में सब्र सबसे दुर्लभ चीज़ है।

एक और पहलू है जो मीडिया में कम चर्चा में है: कांग्रेस इस गृहयुद्ध से सबसे ज़्यादा फ़ायदे में है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं, MUDA ज़मीन घोटाले की जाँच चल रही है — लेकिन BJP का अंदरूनी बवाल इन मुद्दों से जनता का ध्यान हटा रहा है। द हिंदू की एक रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक में BJP की संगठनात्मक कमज़ोरी कांग्रेस को विपक्ष के दबाव से राहत दे रही है।

बड़ा सवाल यह भी है कि क्या यह सिर्फ़ कर्नाटक की कहानी है? BJP में परिवारवाद का मुद्दा राष्ट्रीय है — चाहे महाराष्ट्र में अजित पवार हों, बिहार में चिराग पासवान, या कर्नाटक में विजयेंद्र। पार्टी जो दूसरों पर 'वंशवाद' का आरोप लगाती है, उसके अपने घर में वंशवाद की जड़ें कितनी गहरी हैं — यह सवाल अब खुलकर पूछा जा रहा है।

आने वाले हफ़्तों में देखने लायक यह होगा कि क्या BJP का राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा या संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष कर्नाटक दौरे पर आते हैं। अगर संतोष — जो ख़ुद कर्नाटक के हैं — बेंगलुरु पहुँचते हैं, तो समझिए कि हाईकमान ने 'ऑपरेशन शांति' शुरू कर दिया है। अगर नहीं आते, तो इसका मतलब है कि दिल्ली ने तय किया है कि यह घाव अभी और पकने दो।

कर्नाटक BJP का यह संकट एक क्लासिक 'कैच-22' है: विजयेंद्र को रखो तो बग़ावत बढ़ेगी, हटाओ तो येदियुरप्पा रूठेंगे। और जब पिता रूठता है तो वोट रूठते हैं — दक्षिण में भगवा ख़ेमे के लिए यही सबसे ख़तरनाक बात है। सवाल यह नहीं कि विजयेंद्र जाएँगे या रहेंगे — सवाल यह है कि मोदी-शाह इस फंदे से निकलने का कौन-सा रास्ता चुनेंगे, और वह रास्ता दक्षिण भारत में BJP की ज़मीन बचाएगा या और खोदेगा?

आरोप और दावे संबंधित स्रोतों और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित हैं और जब तक अदालत फ़ैसला न दे, अप्रमाणित माने जाएँ; सब-ज्यूडिस मामलों की रिपोर्टिंग बिना पूर्वाग्रह के की गई है।

इंडिया हेराल्ड के संपादकीय मानकों के तहत AI सहायता से रिपोर्ट और लेखन; प्रकाशन का निर्णय मानव संपादक करते हैं।

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मुख्य बातें

  • कर्नाटक BJP में विजयेंद्र को हटाने की माँग उपचुनाव हार के बाद तेज़ हुई — लेकिन असल लड़ाई लिंगायत वोटबैंक पर नियंत्रण की है
  • दिल्ली हाईकमान की चुप्पी रणनीतिक 'वेट एंड वॉच' है — येदियुरप्पा को नाराज़ करना और बागियों को नज़रअंदाज़ करना दोनों ख़तरनाक
  • BJP का अंदरूनी बवाल कांग्रेस सरकार पर MUDA जैसे आरोपों से ध्यान हटा रहा है — विपक्ष का सबसे बड़ा हथियार ख़ुद BJP बन रही है
  • परिवारवाद का सवाल अब BJP के लिए राष्ट्रीय शर्मिंदगी बन सकता है — वही आरोप जो वह दूसरों पर लगाती है

आँकड़ों में

  • कर्नाटक में लिंगायत समुदाय लगभग 17% आबादी — BJP का सबसे भरोसेमंद वोटर बेस
  • 2018 में येदियुरप्पा के नेतृत्व में BJP कर्नाटक में सबसे बड़ी पार्टी बनी थी

छह सवाल: कौन, क्या, कब, कहाँ, क्यों, कैसे

  • कौन: कर्नाटक BJP के बागी नेता और प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र (येदियुरप्पा के पुत्र) — News18 के अनुसार
  • क्या: विजयेंद्र को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने की खुली माँग और पार्टी में गुटबाज़ी का प्रकोप — News18 रिपोर्ट
  • कब: कर्नाटक उपचुनाव 2024 के नतीजों के बाद बगावत खुलकर सामने आई — News18
  • कहाँ: कर्नाटक — बेंगलुरु और दिल्ली दोनों में पार्टी के भीतर सियासी हलचल — News18
  • क्यों: उपचुनाव में BJP की खराब परफ़ॉर्मेंस, लिंगायत राजनीति पर परिवारवाद का आरोप, और कई वरिष्ठ नेताओं की नाराज़गी — News18 रिपोर्ट
  • कैसे: बागी नेताओं ने दिल्ली हाईकमान को पत्र और सार्वजनिक बयानों के ज़रिये विजयेंद्र को बदलने का दबाव बनाया — News18 के अनुसार

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

कर्नाटक BJP में विजयेंद्र के खिलाफ बगावत क्यों हो रही है?

उपचुनाव 2024 में BJP की खराब कारगुज़ारी के बाद बागी नेताओं ने विजयेंद्र के नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं। लेकिन गहरा कारण लिंगायत वर्चस्व और परिवारवाद को लेकर ओबीसी-दलित नेताओं की नाराज़गी है — News18 रिपोर्ट के अनुसार।

विजयेंद्र को हटाने पर दिल्ली हाईकमान ख़ामोश क्यों है?

विजयेंद्र को हटाने से येदियुरप्पा नाराज़ होंगे जिससे लिंगायत वोटबैंक में दरार पड़ सकती है। रखने से बागी और खिसकेंगे। यह 'कैच-22' स्थिति है जिसमें हाईकमान 'वेट एंड वॉच' रणनीति अपना रही है।

क्या कर्नाटक BJP संकट का असर 2028 विधानसभा चुनाव पर पड़ेगा?

अगर यह गुटबाज़ी जल्द नहीं सुलझी तो कांग्रेस को सीधा फ़ायदा मिलेगा। BJP का अंदरूनी बवाल पहले से ही MUDA जैसे कांग्रेस पर लगे आरोपों से ध्यान हटा रहा है — द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार।

बी.वाई. विजयेंद्र कौन हैं?

बी.वाई. विजयेंद्र कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा के पुत्र हैं और कर्नाटक BJP के प्रदेश अध्यक्ष हैं — News18 के अनुसार।

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