UNSC 2028-29: जयशंकर का SHANTI विजन — P5 की नाकामी को भारत ने अपना सबसे बड़ा हथियार कैसे बनाया?

Singh Anchala

जयशंकर ने UNSC में 2028-29 की अस्थायी सीट के लिए भारत की दावेदारी पेश करते हुए SHANTI विजन लॉन्च किया है। यह P5 देशों — अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन, फ़्रांस — के वीटो-जनित गतिरोध के बीच भारत को ग्लोबल साउथ की एकमात्र विश्वसनीय, ग़ैर-ध्रुवीकृत आवाज़ के रूप में स्थापित करने की गणनात्मक चाल है।

पाँच ताक़तवर देशों के पास वीटो है — और उन्होंने उसका इस्तेमाल इतनी बार किया है कि दुनिया का सबसे शक्तिशाली सुरक्षा ढाँचा आज एक जाम हुई सड़क जैसा दिखता है। यूक्रेन पर रूस वीटो करता है, ग़ज़ा पर अमेरिका वीटो करता है, और बाक़ी 188 देश बस देखते रहते हैं। ठीक इसी भीड़भाड़ के बीच एस. जयशंकर ने एक दरवाज़ा खोला है — और उस दरवाज़े का नाम है SHANTI विजन।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने UNSC में 2028-29 की अस्थायी सीट के लिए औपचारिक दावेदारी पेश की है और इसके साथ ही जयशंकर ने SHANTI विजन लॉन्च किया है — Security, Harmony, Assistance, Negotiation, Technology, Inclusiveness — यानी छह स्तंभों पर खड़ा एक ऐसा ढाँचा जो सीधे-सीधे P5 की विफलताओं के सामने आईना रखता है।

सवाल यह है कि एक अस्थायी सीट — जिसमें वीटो का अधिकार नहीं होता — के लिए इतनी भव्य रणनीति क्यों? जवाब इतना सरल नहीं है जितना दिखता है।

वीटो का क़ब्रिस्तान और भारत का मौक़ा

पिछले तीन सालों का रिकॉर्ड देखिए। रूस ने यूक्रेन से जुड़े हर प्रस्ताव पर वीटो किया। अमेरिका ने ग़ज़ा में सीज़फ़ायर के कम से कम तीन प्रस्तावों को रोका। चीन ने म्यांमार और उत्तर कोरिया पर किसी भी कड़ी कार्रवाई को ठंडे बस्ते में डाल दिया। UNSC — जिसे द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद दुनिया की शांति का संरक्षक बनाया गया था — आज ख़ुद ही शांति का सबसे बड़ा अवरोधक बन चुका है।

और ठीक यही वह दरार है जिसमें जयशंकर ने भारत का झंडा गाड़ा है। जब P5 आपस में लड़ रहे हों, तो बाक़ी दुनिया को किसी ऐसी आवाज़ की ज़रूरत है जो किसी गुट में न हो — न नाटो में, न ब्रिक्स की चीनी छतरी के नीचे। भारत ने पिछले कुछ वर्षों में यही जगह बनाई है: रूस से तेल ख़रीदो, अमेरिका से हथियार लो, चीन से सीमा पर लड़ो — और फिर भी सबसे बात करो।

SHANTI विजन — शब्दों के पीछे का हिसाब

SHANTI सिर्फ़ एक अच्छा संक्षिप्त नाम (acronym) नहीं है — यह एक कूटनीतिक स्टेटमेंट है। इसके छह स्तंभों को ध्यान से देखें तो हर एक P5 की किसी न किसी कमज़ोरी पर उँगली रखता है। 'Negotiation' — यानी बातचीत — सीधे-सीधे वीटो-कल्चर पर तंज़ है। 'Inclusiveness' — यानी समावेशिता — उस बंद क्लब को चुनौती है जिसमें 1945 के बाद से कोई नया स्थायी सदस्य नहीं जोड़ा गया। 'Technology' — यानी तकनीक — भारत की डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (UPI, आधार, CoWIN) की सफलता को वैश्विक शासन मॉडल के रूप में पेश करने की चाल है।

दैनिक जागरण के अनुसार यह विज़न दस्तावेज़ भारत के G20 अध्यक्षता (2023) के दौरान बनाए गए ग्लोबल साउथ नेटवर्क को UNSC की मेज़ तक ले जाने का प्रयास है।

पॉलिटिकल पल्स

सियासी गलियारों में फुसफुसाहट यह है कि SHANTI विजन का समय चुनाव से भी जुड़ा है। 2028-29 की UNSC सीट का कार्यकाल ठीक उस दौर में शुरू होगा जब भारत में अगले आम चुनावों की तैयारी चरम पर होगी। एक सफल UNSC कार्यकाल — ख़ासतौर पर अगर भारत किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय संकट में मध्यस्थ की भूमिका निभा सके — सत्तारूढ़ दल के लिए विदेश नीति को चुनावी हथियार बनाने का सुनहरा मौक़ा बन सकता है।

ट्रेड हलकों में चर्चा यह भी है कि चीन इस बार भारत की दावेदारी में अड़ंगा डालने की कोशिश कर सकता है — ठीक वैसे ही जैसे उसने 2005 में G4 (भारत, जापान, जर्मनी, ब्राज़ील) के स्थायी सदस्यता प्रस्ताव को टारपीडो किया था। पाकिस्तान पहले ही 'यूनाइटिंग फ़ॉर कंसेंसस' ग्रुप के ज़रिए विरोध की ज़मीन तैयार कर रहा है।

(यह इंडस्ट्री चर्चा और राजनयिक अटकलों पर आधारित है, पुष्ट तथ्य नहीं।)

असली दांव — अस्थायी सीट या स्थायी सदस्यता की ज़मीन?

इंडिया हेराल्ड का पॉलिटिकल रीड यह है कि SHANTI विज़न का असली लक्ष्य 2028-29 की अस्थायी सीट नहीं — बल्कि उसके पार है। हर बार जब भारत UNSC में बैठता है (आख़िरी बार 2021-22 में), वह स्थायी सदस्यता की माँग को फिर से ज़िंदा करता है। लेकिन इस बार रणनीति बदली हुई है। पहले भारत कहता था — 'हमें भी जगह दो।' अब जयशंकर कह रहे हैं — 'देखो, तुम्हारा सिस्टम काम नहीं कर रहा; हमारे पास विकल्प है।' यह माँगने और पेश करने के बीच का फ़र्क़ है — और कूटनीति में यह फ़र्क़ बहुत बड़ा है।

SHANTI विज़न दरअसल भारत की 'मल्टी-अलाइनमेंट' नीति का संस्थागत रूप है। G20 अध्यक्षता के दौरान भारत ने अफ़्रीकन यूनियन को सदस्यता दिलवाई, वॉयस ऑफ़ ग्लोबल साउथ समिट शुरू की, और अब UNSC में उसी ग्लोबल साउथ की शक्ति को सुरक्षा परिषद की मेज़ पर ले जाने की कोशिश कर रहा है।

आगे क्या — किस पर नज़र रखें

आने वाले महीनों में देखने लायक़ कई चीज़ें होंगी। पहला — एशिया-पैसिफ़िक ग्रुप में भारत की दावेदारी को किन देशों का समर्थन मिलता है और चीन कितनी सक्रियता से उसे रोकने की कोशिश करता है। दूसरा — क्या अमेरिका, जो भारत की स्थायी सदस्यता का मौखिक समर्थन करता रहा है, इस अस्थायी सीट के लिए खुले तौर पर प्रचार करेगा या चुपचाप बैठा रहेगा। तीसरा — और शायद सबसे अहम — क्या भारत यूक्रेन-रूस या ग़ज़ा जैसे किसी संकट में ठोस मध्यस्थता की पहल करेगा, जो SHANTI विज़न को सिर्फ़ काग़ज़ी दस्तावेज़ से असली कूटनीतिक करेंसी में बदल सके।

P5 की नाकामी भारत के लिए एक खुली खिड़की है। लेकिन खिड़कियाँ हमेशा खुली नहीं रहतीं। अगर यूक्रेन या ग़ज़ा में कोई समझौता हो गया और P5 ने दिखा दिया कि वे अब भी काम कर सकते हैं, तो भारत का 'हम विकल्प हैं' वाला तर्क कमज़ोर पड़ जाएगा। जयशंकर यह जानते हैं — इसीलिए SHANTI विज़न अभी लॉन्च हुआ है, जब गतिरोध चरम पर है।

सवाल अब यह नहीं है कि भारत को अस्थायी सीट मिलेगी या नहीं — वह लगभग तय है। असली सवाल यह है: क्या 2028-29 में भारत कुछ ऐसा करके दिखाएगा जो 1945 से जमे हुए इस ढाँचे को हिलाने की शुरुआत बन सके? या फिर यह एक और कार्यकाल होगा जो बयानों में शुरू होकर फ़ाइलों में ख़त्म हो जाएगा?

आपके रात के खाने की मेज़ पर यही बात ले जाइए — दुनिया का सबसे ताक़तवर सुरक्षा ढाँचा जाम है, और एक देश जो उसका सदस्य भी नहीं है, कह रहा है कि मेरे पास चाबी है। चाबी असली है या नक़ली — यह 2028 में पता चलेगा।

आरोपों और दावों की रिपोर्टिंग नामित स्रोतों पर आधारित है और जब तक अदालत ने फ़ैसला नहीं दिया, ये अप्रमाणित हैं; विचाराधीन मामलों की रिपोर्टिंग बिना पूर्वाग्रह के की गई है।

इंडिया हेराल्ड के संपादकीय मानकों के तहत AI सहायता से रिपोर्ट और लेखन; प्रकाशन का निर्णय मानव संपादक करते हैं।

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मुख्य बातें

  • जयशंकर ने UNSC 2028-29 अस्थायी सीट के लिए SHANTI विज़न लॉन्च किया — छह स्तंभ जो सीधे P5 की विफलताओं पर उँगली रखते हैं
  • भारत की रणनीति बदली है: अब 'हमें जगह दो' नहीं बल्कि 'तुम्हारा सिस्टम फ़ेल है, हमारे पास विकल्प है' — माँगने से पेश करने का अंतर
  • SHANTI विज़न G20 अध्यक्षता के ग्लोबल साउथ नेटवर्क को UNSC की मेज़ तक ले जाने का संस्थागत प्रयास है
  • असली लक्ष्य अस्थायी सीट से परे है — 2028-29 का कार्यकाल स्थायी सदस्यता की ज़मीन तैयार करने का मौक़ा है
  • समय का चुनाव भी सोचा-समझा: P5 का गतिरोध चरम पर है, यही वह खिड़की है जो हमेशा खुली नहीं रहेगी

आँकड़ों में

  • 1945 से UNSC में कोई नया स्थायी सदस्य नहीं जोड़ा गया — 80+ साल पुराना बंद क्लब
  • भारत का आख़िरी UNSC अस्थायी कार्यकाल 2021-22 था — अब 2028-29 के लिए दावेदारी
  • SHANTI विज़न के 6 स्तंभ: Security, Harmony, Assistance, Negotiation, Technology, Inclusiveness

छह सवाल: कौन, क्या, कब, कहाँ, क्यों, कैसे

  • कौन: विदेश मंत्री एस. जयशंकर और भारत सरकार
  • क्या: UNSC में 2028-29 अस्थायी सीट के लिए भारत की दावेदारी और SHANTI विजन (Security, Harmony, Assistance, Negotiation, Technology, Inclusiveness) का औपचारिक शुभारंभ
  • कब: 2026 में, दावेदारी की औपचारिक घोषणा के साथ
  • कहाँ: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC), न्यूयॉर्क
  • क्यों: P5 देशों के वीटो-गतिरोध के बीच ग्लोबल साउथ की ग़ैर-ध्रुवीकृत आवाज़ के रूप में भारत को स्थापित करना और स्थायी सदस्यता की ज़मीन तैयार करना
  • कैसे: SHANTI विजन के छह स्तंभों — सुरक्षा, सद्भाव, सहायता, वार्ता, तकनीक, समावेशिता — के ज़रिए एक वैकल्पिक बहुपक्षीय ढाँचा प्रस्तुत करके, दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

SHANTI विज़न क्या है और इसके कितने स्तंभ हैं?

SHANTI विज़न भारत द्वारा UNSC 2028-29 अस्थायी सीट के लिए लॉन्च किया गया कूटनीतिक ढाँचा है। इसके छह स्तंभ हैं — Security (सुरक्षा), Harmony (सद्भाव), Assistance (सहायता), Negotiation (वार्ता), Technology (तकनीक), Inclusiveness (समावेशिता)। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार यह G20 अध्यक्षता के ग्लोबल साउथ नेटवर्क का विस्तार है।

भारत को UNSC अस्थायी सीट आख़िरी बार कब मिली थी?

भारत का आख़िरी UNSC अस्थायी सदस्यता कार्यकाल 2021-22 में था। अब भारत ने 2028-29 के कार्यकाल के लिए दावेदारी पेश की है।

क्या अस्थायी सदस्य को वीटो का अधिकार होता है?

नहीं। UNSC में वीटो का अधिकार केवल पाँच स्थायी सदस्यों (P5 — अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन, फ़्रांस) को है। अस्थायी सदस्य मतदान कर सकते हैं लेकिन वीटो नहीं कर सकते।

भारत की UNSC स्थायी सदस्यता में सबसे बड़ी बाधा क्या है?

सबसे बड़ी बाधा यह है कि UNSC सुधार के लिए P5 सदस्यों की सहमति ज़रूरी है, और चीन ने अब तक भारत की स्थायी सदस्यता का विरोध किया है। पाकिस्तान भी 'यूनाइटिंग फ़ॉर कंसेंसस' ग्रुप के ज़रिए विरोध करता रहा है।

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