शेख हसीना की ढाका वापसी और तारिक रहमान से 'डील' — क्या दिल्ली ने चुपचाप अपना सबसे बड़ा दांव खेल दिया?

Singh Anchala

शेख हसीना ने भारत में निर्वासन के बाद बांग्लादेश वापसी का ऐलान किया है। नवभारत टाइम्स के अनुसार तारिक रहमान के साथ सत्ता-बँटवारे की डील की चर्चाएँ हैं, मगर इसके पीछे भारत की कूटनीतिक गणित और बंगाल की खाड़ी की सुरक्षा का बड़ा दांव छिपा है।

एक औरत जो दस महीने पहले अपने ही देश से हेलिकॉप्टर में भागी, आज वही ऐलान कर रही है कि वह वापस लौटेगी — उसी ढाका में, जहाँ उसकी कुर्सी के नीचे से ज़मीन खिसकी थी। शेख हसीना की बांग्लादेश वापसी की घोषणा 2026 की सबसे ख़तरनाक राजनीतिक चाल है — और इसकी असली कहानी ढाका में नहीं, दिल्ली की गलियारों में लिखी जा रही है।

नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, हसीना की वापसी के पीछे तारिक रहमान के साथ एक 'सीक्रेट डील' की चर्चा है। तारिक — बीएनपी की ख़ालिदा ज़िया के बेटे और लंदन से बांग्लादेश की राजनीति की डोर हिलाने वाले शख़्स — के साथ हसीना का कोई समझौता? यह वैसा ही है जैसे दो बाघ एक ही पिंजरे में रहने को राज़ी हों। सवाल यह है कि किसने इन दोनों को एक मेज़ पर बैठाया।

इसका जवाब खोजने के लिए ढाका या लंदन नहीं, दिल्ली के साउथ ब्लॉक की ओर देखना होगा। बांग्लादेश में 2024 के सत्ता पलट के बाद से भारत-बांग्लादेश संबंधों में ज़बरदस्त खटास आई। अंतरिम सरकार के दौर में सीमा पर तनाव बढ़ा, हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमलों ने भारत में राजनीतिक तूफ़ान खड़ा किया, और — सबसे अहम — बंगाल की खाड़ी में चीन की नौसैनिक गतिविधियों ने भारत की सामरिक चिंता को नई ऊँचाई दे दी। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के हवाले से, चीन ने बांग्लादेश के चटगाँव बंदरगाह के आसपास अपनी मौजूदगी बढ़ाई है — भारत के लिए यह सीधा ख़तरा है।

पॉलिटिकल पल्स

सियासी गलियारों में फुसफुसाहट यह है कि दिल्ली ने 'बैकडोर डिप्लोमेसी' का एक पुराना फॉर्मूला अपनाया है — दो दुश्मनों को एक-दूसरे से मिलाओ, ताकि तीसरा (इस मामले में चीन-समर्थित ताकतें) कमज़ोर पड़े। हसीना-तारिक डील अगर सच है, तो यह भारत के लिए दोहरी जीत हो सकती है: एक, ढाका में एक ऐसी सरकार जो दिल्ली से दुश्मनी नहीं रखे; दो, बीएनपी को जमात-ए-इस्लामी के प्रभाव से अलग किया जा सके। ट्रेड हलकों में चर्चा यह भी है कि हसीना की वापसी के बदले भारत ने तीस्ता जल-बँटवारे पर कोई नरम रुख़ दिखाया हो सकता है — हालाँकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है।

(यह इंडस्ट्री चर्चा और अपुष्ट अटकलों पर आधारित है, पुष्ट तथ्य नहीं।)

लेकिन इस पूरे खेल में एक ज़हरीला काँटा है जिसे कोई नहीं छू रहा। शेख हसीना पर बांग्लादेश में दर्जनों हत्या के मुक़दमे दर्ज हैं — 2024 के आंदोलन में मारे गए सैकड़ों प्रदर्शनकारियों के परिवार न्याय माँग रहे हैं। द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (ICC) में भी हसीना के ख़िलाफ़ शिकायतें दर्ज हुई हैं। अगर तारिक रहमान सत्ता-बँटवारे के बदले इन मुक़दमों से हसीना को बचाने का वादा कर रहे हैं, तो बांग्लादेश की सड़कें फिर उबल सकती हैं।

और फिर है पश्चिम बंगाल का कोण — जिसे दिल्ली और ढाका दोनों ज़ाहिर तौर पर अनदेखा कर रहे हैं, पर कोलकाता में इसकी धमक अलग है। हसीना की वापसी से बंगाल में बांग्लादेशी शरणार्थियों का मुद्दा फिर चुनावी ईंधन बनेगा। ममता बनर्जी इसे कैसे खेलेंगी — सहानुभूति कार्ड या राष्ट्रवाद — यह 2027 के चुनावों की एक अहम चाल होगी। बीजेपी पहले से 'घुसपैठ' के नैरेटिव पर काम कर रही है; हसीना की वापसी उस नैरेटिव को या तो कमज़ोर करेगी (अगर शरणार्थी वापस जाते हैं) या और मज़बूत (अगर अस्थिरता बढ़ती है)।

इंडिया हेराल्ड का पॉलिटिकल रीड यह है कि हसीना की वापसी की असली चाबी न ढाका में है, न लंदन में — वह दिल्ली के पास है, और दिल्ली इसे 'बंगाल की खाड़ी डॉक्ट्रिन' के तहत खेल रही है। चीन को चटगाँव से दूर रखना, सीमा पर BSF की स्थिति मज़बूत करना, और बांग्लादेश में एक ऐसी सरकार बैठाना जो कम-से-कम दुश्मन न हो — ये तीन लक्ष्य हैं। तारिक रहमान से डील इसका ज़रिया है, हसीना इसका उपकरण।

मगर उपकरण बनना हसीना के स्वभाव में नहीं है। यह वही महिला है जिसने 15 साल बांग्लादेश पर लोहे के हाथ से राज किया। अगर वह ढाका पहुँचीं और फिर अपने ही खेल खेलने लगीं — जमात को कुचलने के नाम पर विपक्ष को ख़त्म करना, सेना को अपने इशारों पर नचाना — तो दिल्ली का सारा 'मास्टरप्लान' उल्टा पड़ सकता है।

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आने वाले हफ़्तों में देखिए — अगर भारत के विदेश मंत्रालय 'बांग्लादेश की आंतरिक मामला' वाला बयान दे और साथ-साथ RAW प्रमुख ढाका दौरे पर निकलें, तो समझ लीजिए कि जो चर्चा है वह चर्चा नहीं, तैयारी है। और अगर तारिक रहमान लंदन से अचानक 'बीमारी' का हवाला देकर चुप हो जाएँ, तो डील पक चुकी होगी। असली सवाल यह नहीं कि हसीना लौटेंगी या नहीं — सवाल यह है कि लौटने के बाद वह किसकी कठपुतली होंगी, या कठपुतली चलाने वाले को ही मात दे देंगी?

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मुख्य बातें

  • शेख हसीना की ढाका वापसी के पीछे तारिक रहमान से सत्ता-बँटवारे की कथित डील है, हालाँकि दोनों पक्षों ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की — नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट।
  • बंगाल की खाड़ी में चीन की बढ़ती नौसैनिक मौजूदगी भारत की सबसे बड़ी सामरिक चिंता है — रॉयटर्स के अनुसार चटगाँव बंदरगाह के आसपास चीन ने गतिविधियाँ बढ़ाई हैं।
  • हसीना पर बांग्लादेश में दर्जनों हत्या के मुक़दमे और ICC में शिकायतें दर्ज हैं — द हिंदू की रिपोर्ट।
  • पश्चिम बंगाल में 2027 चुनावों से पहले शरणार्थी मुद्दा फिर गर्म हो सकता है — बीजेपी और TMC दोनों के लिए चुनावी ईंधन।
  • भारत की 'बंगाल की खाड़ी डॉक्ट्रिन' — चीन को चटगाँव से दूर रखना, सीमा सुरक्षा और ढाका में अनुकूल सरकार — इस पूरी कवायद की असली धुरी है।

आँकड़ों में

  • 2024 में बांग्लादेश सत्ता पलट के दौरान सैकड़ों प्रदर्शनकारी मारे गए — हसीना पर दर्जनों हत्या के मुक़दमे दर्ज हैं (द हिंदू)
  • चीन ने बांग्लादेश के चटगाँव बंदरगाह के आसपास अपनी नौसैनिक मौजूदगी बढ़ाई है (रॉयटर्स)
  • शेख हसीना ने लगभग 15 वर्षों तक बांग्लादेश पर निरंतर शासन किया

छह सवाल: कौन, क्या, कब, कहाँ, क्यों, कैसे

  • कौन: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और बीएनपी नेता तारिक रहमान — दोनों दशकों के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी।
  • क्या: हसीना ने भारत में निर्वासन से बांग्लादेश वापसी का ऐलान किया; तारिक रहमान से कथित सत्ता-बँटवारे की डील की चर्चा, नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक।
  • कब: 2026 में, जबकि बांग्लादेश में अंतरिम सरकार अभी सत्ता में है।
  • कहाँ: भारत (जहाँ हसीना निर्वासन में हैं) और बांग्लादेश (ढाका, जहाँ वापसी की योजना)।
  • क्यों: नवभारत टाइम्स के अनुसार, हसीना का कदम राजनीतिक पुनर्वापसी और अवामी लीग की ज़मीनी ताकत बचाने के लिए है; विश्लेषकों का मानना है कि भारत की सीमा सुरक्षा और बंगाल की खाड़ी में चीन की बढ़ती मौजूदगी भी पृष्ठभूमि में है।
  • कैसे: कथित रूप से तारिक रहमान के साथ बैकचैनल बातचीत और सत्ता-साझेदारी के फॉर्मूले के ज़रिए — हालाँकि दोनों पक्षों ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

शेख हसीना बांग्लादेश वापस क्यों लौट रही हैं?

नवभारत टाइम्स के अनुसार, हसीना ने निर्वासन के बाद ढाका वापसी का ऐलान किया है। कथित रूप से तारिक रहमान के साथ सत्ता-बँटवारे की बातचीत हुई है, हालाँकि आधिकारिक पुष्टि नहीं है। विश्लेषकों का मानना है कि अवामी लीग की राजनीतिक ज़मीन बचाना और चीन-समर्थित ताकतों को कमज़ोर करना इसके पीछे की गणित है।

तारिक रहमान कौन हैं और हसीना से उनकी डील क्या है?

तारिक रहमान बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री ख़ालिदा ज़िया के बेटे और बीएनपी के प्रमुख नेता हैं, जो लंदन से पार्टी का संचालन करते हैं। चर्चाओं के मुताबिक, हसीना की वापसी के बदले सत्ता-साझेदारी और मुक़दमों में नरमी का फॉर्मूला तैयार हुआ हो सकता है — पर दोनों पक्षों ने इसकी पुष्टि नहीं की।

शेख हसीना की वापसी से भारत पर क्या असर पड़ेगा?

भारत के लिए तीन बड़े असर हैं: बंगाल की खाड़ी में चीन की बढ़ती मौजूदगी पर रोक, भारत-बांग्लादेश सीमा पर तनाव कम होना, और पश्चिम बंगाल में शरणार्थी मुद्दे का 2027 चुनावों पर प्रभाव। अगर ढाका में भारत-अनुकूल सरकार बनती है तो सामरिक स्थिति मज़बूत होगी।

क्या शेख हसीना पर बांग्लादेश में मुक़दमे चल रहे हैं?

हाँ, द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार हसीना पर बांग्लादेश में दर्जनों हत्या के मुक़दमे दर्ज हैं और अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (ICC) में भी शिकायतें दर्ज हुई हैं। 2024 के आंदोलन में मारे गए प्रदर्शनकारियों के परिवार न्याय की माँग कर रहे हैं।

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