ओलिंपिक क्वालिफायर के लिए मैरीकॉम और जरीन के बीच ट्रायल मैच कल, निखत ने कहा- मुझ पर कोई दबाव नहीं

Kumar Gourav

बॉक्सर एमसी मैरीकॉम और निखत जरीन के बीच टोक्यो ओलिंपिक क्वालिफायर के लिए 51 किलोग्राम भार वर्ग में ट्रायल मुकाबला शनिवार को नई दिल्ली मेें होगा। गुरुवार को मैरीकॉम ने रितु ग्रेवाल और निखत जरीन ने ज्योति गुलिया को हराकर दो-दिवसीय ट्रायल मुकाबले के फाइनल में पहुंची। जरीन अक्टूबर से ही सिलेक्शन पॉलिसी पर सवाल उठाते हुए मैरीकॉम के खिलाफ ट्रायल मुकाबले की मांग कर रही थीं। वहीं, मैरीकॉम ने कहा था कि वे सिलेक्शन पॉलिसी का पालन करेंगी।

 

निखत ने कहा, ‘‘मैं बड़ी बेसब्री से इस मुकाबले का इंतजार कर रही हूं। मैं अपना सौ फीसदी दूंगी। मुझ पर कोई दबाव नहीं है। मैं इस बाउट(मुकाबले) की मांग कर रही थी और अब यह होने जा रहा है। मुझे नतीजे की परवाह नहीं।’’ एक अन्य मुकाबले में वर्ल्ड यूथ खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली साक्षी चौधरी ने एशियन रजत पदक विजेता मनीषा मौन को 57 किलोग्राभ भार वर्ग में हराया। वहीं, पूर्व नेशनल चैम्पियन सिमरनजीत कौर ने 60 किलोग्राम भार वर्ग में पवित्रा को हराया। ओलिंपिक क्वालिफायर के मुकाबले अगले साल फरवरी में चीन में खेले जाएंगे।

 

मैरीकॉम-जरीन के बीच विवाद क्या है?
मैरीकॉम इस साल वर्ल्ड चैम्पियनशिप में कांस्य पदक जीती थीं। उन्हें इसी के आधार पर ओलिंपिक क्वॉलिफायर्स में भेजने की बात चल रही थी। हालांकि, नियमों के मुताबिक वर्ल्ड चैम्पियनशिप में स्वर्ण या रजत पदक जीतने वाले बॉक्सर को ही ओलंपिक क्वालिफायर में सीधे एंट्री मिलती है। अन्य सभी को ट्रायल मैच खेलना होता है। टोक्यो ओलिंपिक के लिए क्वालिफायर मुकाबले चीन के वुहान में 3 से 14 फरवरी तक खेले जाएंगे।

 

निखत जरीन ने ट्रायल के लिए खेल मंत्री को पत्र लिखा था
बैठक मे यह साफ किया गया कि मैरी कॉम ने ट्रायल के लिए कभी भी इनकार नहीं किया, लेकिन अध्यक्ष अजय सिंह की यह निजी राय थी कि विश्व चैम्पियनशिप के प्रदर्शन को देखते हुए पदक विजेताओं का ट्रायल में नहीं भेजा जाए। अजय सिंह के इस बयान के बाद ही निखत जरीन ने खेल मंत्री किरण रिजिजू को ट्रायल के लिए पत्र लिखा था। उन्होंने कहा था, ‘मैं बचपन से ही मैरी कॉम से प्रेरित रही हूं। इस प्रेरणा के साथ न्याय करने का सबसे बेहतर तरीका यही हो सकता है कि मैं उनकी तरह एक महान मुक्केबाज बनने की कोशिश करूं। क्या मैरी कॉम खेल की इतनी बड़ी शख्सियत हैं कि उन्हें मुकाबले से दूर रखने की जरूरत है?'

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